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दवा तो नहीं मिली पर दारू मिलने लगी

Sun, 10 Apr 2016 10:29 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
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दवा तो नहीं मिली पर दारू मिलने लगी - फोटो : अमर उजाला
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लधिया घाटी क्षेत्र में न बुनियादी सुविधाएं हैं, न विकास की कोई किरण यहां लोगों को नजर आती है। स्वास्थ्य सुविधाएं भी चौपट हैं। और तो और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) का शासनादेश होने के बावजूद अब तक डॉक्टर का बंदोबस्त नहीं हो सका है, लेकिन वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ यहां लोगों को तोहफे में देसी दारू की दुकान जरूर मिल गई है।
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लधिया घाटी क्षेत्र में श्रीरीठा साहिब के बाद भिंगराड़ा सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। जीआईसी, बैंक आदि यहां वर्षों पूर्व से हैं, लेकिन अतिथि शिक्षकों का नवीनीकरण नहीं होने से स्कूल में पढ़ाने वाला कोई नहीं रह गया है। विधायक पूरन सिंह फर्त्याल की पहल के बाद पिछले साल भिंगराड़ा में एपीएचसी स्वीकृत हुआ, मगर जीओ और पदों के सृजन के बावजूद अस्पताल अब तक शुरू नहीं हो सका है। सीएमओ डा.विनोद टोलिया का कहना है कि शासन ने एपीएचसी को किराए अथवा किसी सरकारी भवन में संचालित करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी डॉक्टर या किसी अन्य स्वास्थ्य कर्मी की यहां तैनाती नहीं की गई है, जिस वजह से अस्पताल शुरू नहीं किया जा सका है।

क्षेत्र के लोगों को प्राथमिक सुविधाएं तो नहीं मिली पर पहली अप्रैल से शराब जरूर मिल रही है। प्रशासन ने चौमेल की देसी दारू की दुकान को भिंगराड़ा शिफ्ट कर दिया है। दुकान खुलने के बाद से दारूबाजों को शराब की कमी नहीं हो रही है।
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भिंगराड़ा स्वास्थ्य उप केंद्र में फार्मेसिस्ट भी नहीं
भिंगराड़ा और आसपास की करीब चार हजार की आबादी के इलाज का अकेला सहारा मातृ शिशु एवं स्वास्थ्य उप केंद्र हैं। इस केंद्र का जिम्मा एकमात्र एएनएम के पास है। उन्हें कुछ अन्य जगहों की भी जिम्मेदारी होने से यह केंद्र नियमित रूप से नहीं खुल पाता है। वहीं लंबे समय से यहां फार्मेसिस्ट का पद खाली है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस पद को भरने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।


पियक्कड़ बनेंगे नौजवान : उमेश
पैरालीगल वालंटियर उमेश भट्ट का कहना है कि शराब की दुकान खुलने से अवैध शराब की बिक्री भले ही कम हो जाएगी, लेकिन इसके नुकसान भी खूब हैं। सबसे ज्यादा असर नौजवानों को पड़ेगा। उनके शराब के आगोश में आने का खतरा बढ़ेगा।


होगा दूरगामी नुकसान : धर्मानंद
ग्रामीण धर्मानंद का कहना है कि बिहार में शराब को बंद किया गया है। वहीं देवभूमि में गांव-गांव में शराब पिलाने के लिए दुकानें खोली जा रही है। इसका दूरगामी नुकसान होगा।

सुविधाओं को जुटाना ज्यादा जरूरी : गिरीश
पूर्व प्रधान गिरीश भट्ट का कहना है कि शराब की दुकान नए शराबियों को पैदा करेगी। शराब की दुकान से ज्यादा जरूरी क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को पूरा करने की थी।
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