चंपावत, लोहाघाट, बाराकोट, पाटी सहित जिले के कई जंगल धधक रहे हैं। जिलेभर में करीब पांच हेक्टेयर से अधिक जंगल आग की चपेट में है। कई जंगलों में बीती रात से आग लगी है। वन विभाग की टीमें आग बुझाने का प्रयास कर रही है। नुकसान की सही जानकारी अभी नहीं है। जंगल की आग की लपटें बाराकोट के सिंगदा के हरि राम के मकान तक पहुंच गई थी। गांव के लोग रातभर आग बुझाने में लगे रहे। भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और किसी तरह मकान आग की चपेट में आने से बचा लिया गया।
पश्चिम क्रांतेश्वर सहित आसपास के कई जंगल आग की चपेट में है। यहां करीब दो हेक्टेयर क्षेत्र में आग फैली होने की सूचना है। चंपावत के वन क्षेत्राधिकारी बृजमोहन टम्टा के नेतृत्व में वन विभाग की टीम आग बुझाने के काम में जुटी रही। इसके अलावा टी बोर्ड के प्रबंधक डेसमंड ने भी 12 चाय श्रमिकों को आग बुझाने के लिए भेजा।
उधर, लोहाघाट के भुमलाई और बाराकोट के सिंगदा में आग लगने से वन संपदा जली। आग ने सिंगदा में बागधारा के पास मिर्तोली, भार्तोली के ऊपरी भाग को चपेट में लिया। बीडीसी सदस्य मनोज सामंत ने आरोप लगाया कि जंगलों को बचाने के लिए विभागीय पहल ढीली है।
जंगल की आग से जली जैचम मंदिर धर्मशाला
पाटी के पमतोला एवं किमाड़ी वन पंचायतों के जंगलों में आग लगने से यहां के प्रसिद्ध जैचम मंदिर की धर्मशाला जल गई। धर्मशाला में मंदिर में होने आयोजनों के लिए रखे गए बर्तन, दरी, बिस्तर, कंबल, दन कालीन आदि भी जल गए। ग्रामीणों ने श्रमदान कर इस धर्मशाला को बनाया था। वन कर्मियों एवं ग्रामीणों के सहयोग से शनिवार देर रात तक आग में काबू पाया जा सका। रेंजर बीएस मेहता ने कहा कि धर्मशाला को हुए नुकसान का जायजा लेकर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। सरपंच ज्योति नरियाल के नेतृत्व में एसडीएम निर्मला बिष्ट से मिलकर ज्येष्ठ उप प्रमुख सीएस मेहता, प्रयाग दत्त, हरिनंदन, कुसुम देवी, महेश चंद्र, मदन मोहन, धर्मानंद आदि ने धर्मशाला के पुनर्निर्माण में सहयोग करने का आग्रह किया।
सेहत पर भारी न पड़े जंगल की आग!
जंगल की आग से शहर के आसपास के आसमान के अलावा सरयू घाटी और भुम्लाई में जीआईसी जानकीधार के निचले हिस्से में बड़े हिस्से में धुंध छा गई। साथ ही तपिश भी बढ़ गई। रविवार को तापमान एक डिग्री सेल्सियस बढ़कर 27 डिग्री तक पहुंच गया। संयुक्त निदेशक डा.आरके जोशी ने बताया कि आग के चलते फैली धुंध स्वास्थ्य पर विपरीत असर डालती है। सांस लेेने में तकलीफ के साथ आंखों में जलन, गले में सूजन, फेफड़े पर प्रभाव और जी मिचलाना जैसी स्थिति पैदा होती है। उन्होंने मास्क लगाने की सलाह भी दी है।