चंपावत/लोहाघाट (चंपावत)। मिरतोला, पाटी, दिगालीचौड़ में रामलीला की धूम मची है, जबकि फोर्ती में भरत मिलाप के साथ लीला का समापन किया गया। पाटी में लक्ष्मण के सूर्पणखा की नाक काटने के बाद खर-दूषण का युद्ध के लिए पंचवटी आना, खर-दूषण कहते हैं-भगिनी को हमारी रूप कुरूप क्यों कीना, राम द्वारा खर दूषण का वध करना, सूर्पणखा का रावण दरबार में पहुंचकर आप बीती सुनाना, रावण का मारीच के पास जाना, मारीच का कपट मृग बनना, रावण द्वारा सीता का हरण करने की लीला दिखाई गई। फोर्ती की रामलीला में लक्ष्मण का मेघनाद का वध करना, सुलोचना का विलाप, रावण का युद्ध में जाना, राम द्वारा रावण वध करने के बाद विभीषण को लंका का राजा बनाने, राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान का अयोध्या पहुंचना, भरत मिलाप के मंचन के साथ लीला का समापन किया गया।
बनबसा (चंपावत)। अंबेडकर ग्राम फागपुर की कुमाऊंनी गायन शैली की रामलीला का मंचन जारी है। तीसरे दिन धनुष यज्ञ, सीता स्वयंवर, परशुराम-लक्ष्मण संवाद के साथ राम-सीता विवाह तक की लीला का मंचन हुआ। हास्य कलाकार राजू सिंह ने दर्शकों का मनोरंजन किया। संगीत संयोजन मन्नू, जगदीश सिंह, संजू फौजी ने किया। इस दौरान कमेटी अध्यक्ष चंद्रप्रकाश, दीवानी राम गंगोला, कैप्टन मोहन चंद, उपप्रधान विमला देवी, सविता बर्मन आदि थे।
टनकपुर। उचौलीगोठ की रामलीला मंच में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम की सुग्रीव से मित्रता और बाली वध तक की लीला का मंचन हुआ। रामलीला के बीच-बीच में हास्य कलाकारों द्वारा दर्शकों को खूब मनोरंजन किया जा रहा है। भगवान श्रीराम के आदेश पर सुग्रीव बाली से युद्ध करता है, लेकिन बाली-सुग्रीव हमशक्ल होने के कारण भगवान राम उन्हें पहचान नहीं पाते हैं। बाद में भगवान राम सुग्रीव को पहचान चिह्न देकर पुन: युद्ध में भेजते हैं और बाली का वध करते हैं। कमेटी अध्यक्ष आनंद सिंह महर, गोविंद महर, पान सिंह, बची सिंह, नाथ सिंह आदि रामलीला की व्यवस्था में जुटे हैं।