पंचेश्वर में प्रस्तावित बहुउद्देशीय बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले लोहाघाट, बाराकोट, पाटी और चंपावत जिले के प्रभावितों की पर्यावरण जन सुनवाई में लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई। हालांकि खुलकर किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया गया, लेकिन बांध निर्माण के बाद डूब क्षेत्र में आने वाले लोगों को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी, कितना मुआवजा मिलेगा, कहां पुनर्वासित किया जाएगा, यह सवाल उन्हें परेशान किए थे। जन सुनवाई में पहुंचे लोगों द्वारा अमर उजाला से बातचीत कर अपनी भावनाएं अभिव्यक्त की।
उपजाऊ खेती और बगीचों से रहना होगा वंचित
कोठेरा से 10 किमी की दूरी तय कर आए चंद्र सिंह गुरूंग का कहना था कि बांध निर्माण से उनके गांव को काफी नुकसान होगा। बांध निर्माण के चलते हमारी संस्कृति, समाज, खेती, बागवानी सभी जलमग्न हो जाएंगे। डूब क्षेत्र में आने वाले लोगों को कहां पुनर्वासित किया जाएगा, यह किसी को पता नहीं है। उनका कहना था कि गांव में उनकी 80 नाली उपजाऊ जमीन है, जिसमें खेती के अलावा बड़ी मात्रा में बगीचे हैं, इससे लोगों को दूर धोना पड़ेगा।
क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी इसका खुलासा करें
करीब 50 किमी की दूरी तय कर आए डुंगरालेटी के प्रधान देवी चंद का कहना था कि वह बांध के विरोध में नहीं हैं, लेकिन डूब क्षेत्र में आने वाले लोगों को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी, इसका खुलासा होना चाहिए। उनका कहना है कि उनके गांव वालों द्वारा 13 सूत्रीय मांगों को लेकर सशर्त खुली बैठक में अनापत्ति प्रमाण पत्र दिए हैं। यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो वे इसका पुरजोर विरोध करेंगे।
विस्थापन बुनियादी सुविधा संपन्न स्थानों पर हो
सूंगरखाल से 40 किमी की दूरी तय कर आए पूर्व ग्राम प्रधान मदन सिंह अधिकारी का कहना था कि बांध निर्माण में प्रभावित होने वाले लोगों को क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी, इसका अभी कोई खुलासा नहीं हो पाया है। उनका कहना था कि बांध निर्माण के बाद विस्थापन ऐसे स्थानों पर किया जाए, जहां लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी, सड़क आदि बुनियादी सुविधाओं के अलावा उपजाऊ जमीन हो।
मुआवजे की रकम से परिवारों में फूट पड़ेगी
चूलागांव से आए जीवानंद भट्ट का कहना है कि इस परियोजना के बनने के बाद मिलने वाले मुआवजे की रकम से परिवारों में फूट पड़ जाएगी। एक परिवार में चार लड़के हैं तो एक को नौकरी मिलेगी और तीन बेरोजगार हो जाएंगे। उनका कहना था कि विस्थापन के बाद उन्हें एक छोटा सा मकान दिया जाएगा, उसमें परिवार के लोग नहीं आ पाएंगे। मकान के लिए परिवार के लोगों में झगड़े होंगे। उनका कहना है कि गांव में उनकी 70-80 नाली उपजाऊ भूमि है। जिसमें उनके पूरे परिवार के लिए वर्षभर के लिए अनाज पैदा हो जाता है।
विस्थापित होने वाले गांवों तक सड़क पहुंचाएं
दस किमी पैदल और 30 किमी गाड़ी का सफर तय कर जन सुनवाई में पहुंचे सुतेड़ा के मनोज पंत का कहना था कि पुनर्वास से पहले विस्थापित होने वाले गांवों तक अनिवार्य रूप से सड़कों का निर्माण किया जाना चाहिए। लोग 8-10 किमी पैदल चलकर जैसे-तैसे मुख्य मार्ग तक पहुंचते हैं। विस्थापन के समय सड़क न होने से उन्हें अपना सामान ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने वर्ग चार और वर्ग पांच के किसानों को भी सभी की तरह मुआवजे देने की मांग की।
जिला मुख्यालय के सर्किल रेटों पर भुगतान हो
65 किमी का सफर तय कर जन सुनवाई में पहुंचे पंथ्यूड़ा के लक्ष्मी दत्त पंत का कहना था कि पंचेश्वर क्षेत्र में भूमि का सर्किल रेट करीब 15 हजार रुपये नाली है। उन्होंने प्रभावितों को जिला मुख्यालय के सर्किल रेटों के हिसाब से मुआवजे का भुगतान करने की बात कही। तराई क्षेत्र में प्रत्येक प्रभावित परिवार को सात-सात एकड़ जमीन देने, विस्थापन से पूर्व लोगों को पूर्ण रूप से विश्वास में लेने पर जोर दिया।
ग्रामीणों को गुमराह कर ली गई हैं अनापत्तियां
बरियूड़ी से 35 किमी का सफर कर जनसुनवाई में पहुंचे सुरेंद्र सामंत ने आरोप लगाया कि गांव में आयोजित खुली बैठक में ग्रामीणों को गुमराह कर भूमि और वन पंचायत की अनापत्ति ले ली गई। ग्रामीणों को बैठक में किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं दी गई। उनके गांव के कई तोक छूटे हुए हैं, जो डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। उन्होंने प्रभावितों को तराई में पांच एकड़ जमीन देने, मकान के बदले कम से कम 30 लाख रुपये का मुआवजा देने की बात कही। मांगे पूरी न होने पर बांध का बहिष्कार करने की बात कही।
ग्रामीणों पर जबरन थोपा जा रहा है पंचेश्वर बांध
निडिल के ओंकार धौनी का कहना था कि पंचेश्वर बांध ग्रामीणों पर जबरन थोपा जा रहा है। न उनके पूर्वजों ने बांध की मांग की थी और न ही किसी व्यक्ति ने मांगा। उन्हें बांध नहीं क्षेत्र में रेल, सड़क, बागवानी, पर्यटन के क्षेत्र में यहां का विकास करने की बात कही। उनका कहना था कि गांव में आयोजित खुली बैठक में कहां तक डूब क्षेत्र आएगा, कौन-कौन परिवार प्रभावित होंगे, ग्रामीणों को किस हिसाब से मुआवजा मिलेगा, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई।