उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने राज्य के निर्माण के लिए शहीद हुए आंदोलनकारियों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि राज्य गठन के 18 वर्ष बीतने के बाद भी राज्य ने तरक्की की राह नहीं पकड़ी और न ही आंदोलनकारियों, लोगों की भावनाओं में खरा उतर सका।
रामलीला मैदान में वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी नवीन मुरारी की अध्यक्षता और जीवन मेहता के संचालन में हुए कार्यक्रम में आंदोलन के दौरान संघर्ष करने के बावजूद चिन्हीकरण से वंचित राज्य आंदोलनकारियों को चिह्नित करने की मांग की गई। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
विधायक पूरन सिंह फर्त्याल को नौ सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम में राज्य आंदोलन से संबंधित नाटक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए। राज्य आंदोलन में शहीद हुए आंदोलनकारियों की वीरांगनाओं और वयोवृद्ध आंदोलनकारियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
राज्य आंदोलनकारी नाथलाल साह, पदमादत्त पुनेठा, हरिशंकर ओली और वीरांगना गीता कलखुड़िया, पुष्पा खोलिया को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर राज्य आंदोलनकारी और ब्लॉक प्रमुख योगेश मेहता, पूर्व विधायक केसी पुनेठा, प्रहलाद सिंह मेहता, मंदीप ढेक, राजू गड़कोटी, केडी सुतेड़ी, नंदन तड़ागी, हिमेश कलखुड़िया, भगीरथ भट्ट, लक्ष्मण सिंह बिष्ट, जीवन गहतोड़ी, पूरन चंद्र उप्रेती, बृजेश माहरा, खीम सिंह बिष्ट, दिलीप सिंह, आनंद पुजारी, गोविंद बोहरा, भाष्कर मुरारी, संजय पंत, संजय फर्त्याल आदि मौजूद थे।