इस बार दिवाली पर्व मनाने की तिथि में किसी तरह का कोई भ्रम नहीं है। धनतेरस हो या फिर भैया दूज, इन सभी पर्वों को मनाने की तिथि की घड़ी और पला में किसी तरह का अंतर नहीं है। इस बार दिवाली पर्व चाहे मैदान में हो या पहाड़ सभी जगह एक ही दिन मनेगा। इससे पहले कई बार पहाड़ और मैदान में दिवाली ही नहीं, बल्कि होली पर्व भी अलग-अलग तारीख को मनाई जाती रही है।
अलग-अलग पंचांगों की मान्यता से पड़ता है फर्क
ज्योतिष सतीश जोशी ने बताया कि पहाड़ों में रामदत्त जोशी के पंचांग की मान्यता है, जबकि मैदानी क्षेत्र में भाष्कर पंचांग का चलन है। दोनों पंचांगों की गणना में घड़ी और पला में अंतर का होना बड़ा फर्क पैदा कर देता है, जिससे कई बार एक ही त्योहार दो-दो दिन मनाया जाता है।
11 नवंबर को होगी दीपावली
ज्योतिषों के मुताबिक इस बार कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी 9 नवंबर को है, लिहाजा इस दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा, जबकि चतुर्दशी 10 नवंबर को होने से इस दिन नरक चतुर्दशी का पर्व होगा। इसके अलावा अमावस्या 11 नवंबर को है, इसलिए इस दिन महालक्ष्मी पूजन का योग बन रहा है। 12 नवंबर को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा होने से इस दिन गोवर्द्धन पूजा की जाएगी, जबकि शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाला भैया दूज का पर्व 13 नवंबर को मनाया जाएगा।
ये है त्योहारों को मनाने की मान्यता
धनतेरस के दिन भगवान धनवंतरी क्षीर सागर से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन इसे धनवंतरी जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन नया बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध कर पृथ्वी को भारमुक्त किया था, इसलिए इसे नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। अमावस्या को भगवान श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे। इस दिन लक्ष्मी का पूजन किया जाता है। गोवर्द्धन पर्व के दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्द्धन पर्वत को अपनी अंगुली में उठा लिया था, इस दिन गाय की भी पूजा की जाती है। भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक भैया दूज की तिथि को यमुना ने यमराज को अपने घर बुलाकर भोजन कराया था, इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।