झूमाधुरी नंदाष्टमी महोत्सव के चौथे और अंतिम दिन 25 हजार से अधिक लोगों ने देवी रथ यात्राओं में शामिल होकर आशीर्वाद लिया। सुहाने मौसम में दोपहर बाद सबसे पहले पाटन पाटनी गांव से मां भगवती की शोभा यात्रा निकली। भगवती के डांगर के रूप में उमेश पाटनी तथा धन सिंह रथ पर विराजमान थे। राईकोट महर गांव से मां महाकाली की शोभा यात्रा निकली, जिसमें मां महाकाली के रूप में राधिका देवी चंवर झुलाते हुए श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रही थीं। दोनों ही गांवों में रविवार की रात देवी जागरण हुआ, जिसमें देव डांगर अवतरित हुए।
सात हजार फिट की ऊंचाई पर स्थित झूमाधुरी पहाड़ी में होने वाले मेले को लेकर सुबह से ही काकड़, पम्दा, बाराकोट, गल्लागांव, सुंई, तड़ागी, रेगडू, बापरू, चौमेल, कर्णकरायत, कलीगांव, चौड़ी, कोलीढेक आदि स्थानों से लोग पहुंचने लगे थे। रथ यात्राएं खाल में थोड़ी देर रुकीं, जहां साक्षात देव डांगरों को चावल दूध का भोग लगाया गया। इस स्थान से देवी रथ यात्राएं खड़ी चढ़ाई के लिए शुरू हुई। श्रद्धालु रस्सों के सहारे मां का जयकारा करते हुए देवी रथ को मंदिर की ओर ले जा रहे थे। दोनों रथों के मंदिर में पहुंचने पर परिक्रमा के बाद यहां जबरदस्त मेला शुरू हो गया।
ग्राम प्रधान सुभाष विश्वकर्मा, पूर्व प्रधान निर्मला टम्टा, जगदीश पाटनी, मोहन पाटनी, बसंत विश्वकर्मा, भगवत पांडेय, रमेश पाटनी, बीपी पांडेय, लक्ष्मी दत्त पाटनी, प्रशासनिक अधिकारी पूरन राम टम्टा, मोहन राम, गिरीश सिंह आदि व्यवस्था में जुटे रहे। महोत्सव के अध्यक्ष जेसी पाटनी तथा महासचिव मोहन पाटनी ने सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।