लोहाघाट (चंपावत)। रविवार को हुई अतिवृष्टि से बैड़ाओड़ गांव के सेरी तोक में भारी क्षति हुई। मलबे से उपजाऊ खेत रौखड़ में तब्दील हो गए। घरों में मलबा, पानी भर गया। इससे 2009 में वहां बादल फटने से हुई तबाही की याद ताजा हो गई। इसके बावजूद सोमवार को दूसरे दिन भी किसी अधिकारी के गांव न आने पर पीड़ितों ने नाराजगी जताई है। ग्राम प्रधान बल्देव प्रसाद का कहना है कि प्रशासन से उन्हें तत्काल राहत का आश्वासन मिला था। पीड़ित लोग अधिकारियों के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन सोमवार को किसी अधिकारी के गांव न पहुंचने से लोगों को निराश होना पड़ा।
ग्रामीणाें का कहना था कि तड़ीगांव-इंद्रपुरी सड़क के निर्माण के समय सारा मलबा उनके गांव के ऊपर डाला गया था। जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया था। सेरी तोक के ऊपर सड़क में न तो नालियां बनी हैं, न ही स्कबर बनाए गए हैं। जिससे सड़क निर्माण के समय डाले गए मलबे के साथ बरसाती पानी गांव की ओर आ गया। जिसने ग्रामीणों पर कहर ढाया। ग्रामीणों ने गांव के विस्थापन को समस्या का स्थायी समाधान बताया। फिलहाल गांव के ऊपर झिझाड़ गधेरे से तलसेरी, नौली गधेरे से तलसेरी तक पक्के नाले के निर्माण की मांग की। इनमें संजय कुमार, उम्मेद राम, जोत प्रकाश, कुंवर राम, जगदीश राम, हयात राम, पार्वती देवी, गोपी देवी, कप्पी देवी, बसंती देवी शामिल हैं।