अभी तो आधी-अधूरी है आपदा से बचाव की तैयारी
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सूखे की आपदा के बाद इस बार अधिक बारिश की आशंका है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इस बार मानसून अवधि (15 जून से 15 सितंबर तक) में औसत से 6 प्रतिशत अधिक बारिश हो सकती है। बारिश में भूस्खलन और रोड बंद होने का खतरा अक्सर रहता है। लेकिन अभी आपदा विभाग की कार्ययोजना नहीं बन सकी है।
चंपावत जिले को आपदा के नजरिए से दोहरी मार झेलनी पड़ती है। जिले के 85 प्रतिशत पहाड़ी हिस्से में भूस्खलन और मार्ग बंद होना सबसे बड़ा खतरा है। तो वहीं मैदानी हिस्सा टनकपुर और बनबसा में बाढ़ तथा जलभराव का खतरा रहता है। अभी नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए पुनर्वास आदि की व्यवस्था नहीं की जा सकी है। राष्ट्रीय राजमार्ग में मलबे के नजरिए से संवेदनशील स्पॉट को भी चयनित नहीं किया जा सका है। खतरे की जद में आने वाले स्कूल और अन्य इमारतों का ब्यौरा भी अभी नहीं मिला है। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि सभी तहसीलों से मानसून के मद्देनजर आपदा की कार्ययोजना मांगी गई है। इस कार्ययोजना के बाद बचाव के पुख्ता उपाय किए जाएंगे।
मुस्तैद है आपदा राहत टीम : मनोज
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मनोज पांडेय का कहना है कि आपदा से निपटने के लिए विभाग और प्रशासन मुस्तैद हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीम जिले में अधिकारियों को दो दिनी ट्रेनिंग दे चुकी है। आपदा से निपटने के लिए जिलाधिकारी के निर्देशन में इंसिडेंट रिस्पोंस सिस्टम (आईआरएस) काम करेगा। कार्रवाई के लिए विभागों में समन्वय और संचार की पुख्ता व्यवस्था है।
12 साल से खड़ी है आपदा की क्रेन
आपदा से बचाव को विभाग के पास भरपूर उपकरण हैं। लेकिन इन उपकरणों का उपयोग कैसे होता है, इसका एक नजारा लोनिवि परिसर में वर्षों से खड़ी क्रेन बताती है। 2004 में करीब 18 लाख रुपये से खरीदी गई इस क्रेन का आपदा से निपटने के लिए कभी भी उपयोग नहीं किया जा सका। इसकी वजह क्रेन को चलाने के लिए आपरेटर का नहीं होना है। क्रेन का काम सड़क पर आए मलबे को साफ करना था। लोनिवि के जूनियर इंजीनियर नंदकिशोर भारती का कहना है कि क्रेन चालू हालत में नहीं है। इसके लिए प्रशासन को पत्र भेजा गया है। बहरहाल क्रेन के चारों तरफ घास और लंबी झाड़ियां उग गई हैं।