बनबसा/टनकपुर (चंपावत)। दिवाली में एक पखवाड़े से भी कम समय बचा है लेकिन तीन दिन लगातार हुई बारिश ने ऐसे हालात बना दिए हैं कि रोशनी की ये त्योहार कई लोगों के लिए ‘अंधेरे’ में बीतने वाला है।
धान बेचकर हर्षोल्लास से दिवाली मनाने की तैयारी कर रहे किसानों के अरमानों पर बारिश ने पानी फेर दिया। बेमौसम बारिश से खेतों में कटी धान की फसल खराब हो गई है। ऐसे में त्योहार मनाना तो दूर कई परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। कुछ लोगों को सालभर के खाने की चिंता सता रही है तो कुछ नुकसान की भरपाई की जुगत न होने से परेशान हैं।
फसल के लिए बारिश जरूरी होती है, लेकिन इस बेमौसमी बारिश ने धान की फसल पूरी तरह बर्बाद कर उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बारिश ने इतना भी मौका नहीं दिया कि खेतों में कट कर पड़ी फसल को वे संभाल पाएं। मेरी और मेरे भाई की करीब चार बीघा धान की फसल बरसाती नाले के उफान में बह गई। बची फसल भी पानी में भीगकर खराब हो चुकी है। चंद दिनों में दीपावली आने वाली है। इतना नुकसान हो गया है, अब त्योहार कैसे मना पाएंगे।
- हरीश चंद्र हैसियत, काश्तकार सैलानीगोठ।
मूसलाधार बारिश की चेतावनी तब मिली जब हमने फसल काटकर खेतों में सूखने के लिए छोड़ दी। हमें क्या पता था कि कटी फसल बटोरने से पहले ही बारिश मेहनत पर पानी फेर देगी। सोचा था हर बार की तरह इस बार भी फसल बेचकर धूमधाम से दिवाली मनाएंगे, लेकिन बारिश ने उम्मीद को चकनाचूर कर दिया है। मेरी करीब पंद्रह बीघा धान की फसल पानी में डूबकर बर्बाद हो गई है। भीगी फसल को सुखाकर भी वह न तो खाने योग्य होगी और ही कोई उसे खरीदेगा। - राजकिशोर मुरारी, काश्तकार छीनीगोठ।
बारिश हमारे साथ ही अन्य किसानों के लिए भी आफत बनकर बरसी। फसल को हुए नुकसान ने दिवाली से पहले दीवाला निकाल दिया है। अब सालभर खाने के लिए भी चावल खरीदना पड़ेगा। हमारी करीब छह बीघा में कटी धान की फसल बारिश से भीगकर खराब हो गई है। - ममता तिवारी, महिला काश्तकार, छीनीगोठ।
- ममता तिवारी, महिला काश्तकार, छीनीगोठ।
गौरव सेनानी कल्याण समिति अध्यक्ष कैप्टन भानी चंद का कहना है कि धान की फसल नष्ट होने से पूर्व सैनिक परिवारों की भी छह माह की मेहनत पर पानी फिर गया है फसल उगाने में किया गया पूरा खर्चा पानी में बह गया। पूर्व सैनिक तो पेंशन से गुजर बसर कर लेंगे, लेकिन छोटे एवं मझोले किसान के आगे तो फांका करने की नौबत आ गई है।
जिला पंचायत सदस्य एवं कृषक पुष्कर कापड़ी का कहना है कि दीपावली पर्व मनाने की चिंता से अधिक किसानी पर निर्भर रहने वाले परिवारों के आगे भुखमरी से निपटने की चिंता आ खड़ी हुई है। क्षेत्र में करीब तीन सौ हेक्टेयर भूमि पर धान की कटी फसल खेतों में खराब हुई है। बटाई पर खेती करने वालों के आगे भुखमरी की समस्या पैदा हो गई है। उन्हें अपने खाने के अलावा खेत स्वामी को आध अनाज देने की चिंता सता रही है।
परिवार की जरूरतें कैसे होंगी पूरी
बनबसा। चंदफार्म में बटाई करने वाले सुरेश कुमार एवं बृजेश कुमार का कहना है कि अगली फसल के लिए भी कर्ज लेने की विवशता पैदा हो गई है। मझगांव निवासी धरम चंद, किशन चंद की फसल खराब होने से उनकी कमर ही टूट चुकी है।
खेतों में खड़ी फसल खराब होने से देवीपुरा निवासी केशवी देवी, नंदा देवी, जानकी देवी के आगे परिवार पालने की चिंता पैदा हो गई है। बमनपुरी निवासी मनोज सिंह राना और राजू टम्टा समझ नहीं पा रहे हैं कि वे परिवार की जरूरतें कैसे पूरी करेंगे। किसानों को नुकसान की भरपाई एवं आने वाली फसल की बुआई की चिंता सताने लगी है।