जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) लोहाघाट के बहुउद्देश्यीय भवन को अन्यत्र बनाने की प्रक्रिया का लोगों ने फिर विरोध किया है। उन्होंने बृहस्पतिवार की देर रात तक कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम कार्यालय में प्रोजेक्ट मैनेजर का घेराव कर आक्रोश जताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार ने एडीएम की ओर से भवन निर्माण कार्य में रोक लगाने बाबत पत्र जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर को दिया। उसके बाद लोग शांत हुए। वहीं विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने मामले में डायट के प्राचार्य और जिला प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए मामले को उच्च न्यायालय ले जाने की बात कही।
पूर्व में भी जब लोगों को डायट के भवन को चंपावत के राकड़ी फुलारा बनाने की भनक लगी तो लोगों ने प्राचार्य को बंधक बनाकर आंदोलन की बात कही थी। विधायक ने देहरादून में मुख्य सचिव और अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण की निदेशक से मिलकर मामले को उठाया था। निदेशक ने एक सप्ताह के अंदर जांच के आदेश दे दिए थे। उसके बाद विधायक फर्त्याल के साथ शिष्टमंडल 17 दिसंबर को जिलाधिकारी से भी मिला।
बृहस्पतिवार को पुन: जब विधायक को सूत्रों से मालूम हुआ कि 27 दिसंबर को पेयजल निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर एचडी पाठक ने जल्द से भूमि के निस्तारण का पत्र जिलाधिकारी और डायट के प्राचार्य केसी शाक्य को भेजा है, तो विधायक के अलावा व्यापार संघ अध्यक्ष भैरव राय, प्रहलाद मेहता, ब्लॉक प्रमुख निर्मल माहरा, भूपाल मेहता, कीर्ति बगौली, गोविंद वर्मा आदि पेयजल निर्माण निगम के कार्यालय में आ धमके। लोगों ने कहा कि जब लोहाघाट में वर्ष 2006 में डायट का विधिवत शुभारंभ हो गया है और करोड़ों रुपए लागत से प्रशासनिक भवन बनाने के साथ यहां 146 नाली भूमि संस्थान को दी गई है, तो फिर चंपावत के राकड़ी फुलारा स्थान पर बहुउद्देश्यीय भवन के निर्माण का कोई औचित्य ही नहीं है। इस दौरान ललित मोहन जोशी, नवीन बोहरा, ललित मोहन कुंवर, दीपक सुतेड़ी, संजू चौबे, गोविंद बोहरा, श्याम ढेक आदि मौजूद थे।