पाटी/देवीधुरा (चंपावत)। कोरोना खतरे के बीच परंपरा की खातिर देवीधुरा के खोलीखांण दुबाचौड़ा मैदान में सोमवार को बगवाल (फल-फूलों से होने वाला संग्राम) खेली गई। हालांकि पहले बगवाल की रस्म को सिर्फ फर्रे के साथ मंदिर की परिक्रमा करके पूरा किया जाना था। तहसीलदार सचिन कुमार ने भी मंदिर कमेटी से बगवाल नहीं होने देने का आग्रह किया था। पर चारों खामों (गहरवाल, वालिग, चम्याल और लमगड़िया खाम) के योद्धा जब परिक्रमा पूरा करके मैदान में पहुंचे तो खुद को बगवाल खेलने से नहीं रोक सके। हाथ में फर्रे और फल-फूल के साथ मुंह में मास्क पहनकर करीब पांच मिनट तक बगवाल खेली गई। पिछले साल बगवाल नौ मिनट तक चली थी और एक लाख से अधिक लोग बगवाल के गवाह बने थे।
सुबह 11.25 बजे मां बाराही धाम मंदिर के पंडित कीर्तिबल्लभ शास्त्री और भुवन जोशी की शंखध्वनि के साथ बगवाल का श्रीगणेश हुआ। हर खाम में 11-11 लोग थे। बगवाल महज पांच मिनट तक हुई। बगवाल देखने के लिए व्यापारियों सहित करीब एक हजार लोग मौजूद थे। बगवाल में तीन योद्धा मामूली रूप से चोटिल हुए। मैदान में प्रवेश करने से पहले चारों खामों और सात थोक (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया, वालिग, गोरना, कटना और फुलाराकोट) के योद्धाओं ने मां वज्र बाराही का जयकारा किया। मैदान में वालिग खाम के बगवाली वीरों ने मुखिया बद्री सिंह बिष्ट के नेतृत्व में सबसे पहले प्रवेश किया। इसके बाद गंगा सिंह चम्याल के नेतृत्व में चम्याल खाम, वीरेंद्र सिंह लमगड़िया के नेतृत्व में लमगड़िया खाम और पान सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गहरवाल खाम के योद्धाओं ने बारी-बारी से मैदान में प्रवेश किया। हर खाम के पांच-पांच योद्धाओं ने फर्रे के साथ मंदिर की परिक्रमा की। इसके फौरन बाद इन खामों ने फल-फूल बरसा कर बगवाल का श्रीगणेश कर दिया। मंदिर कमेटी ने दावा किया कि हर खाम के 11-11 रणबांकुंरों ने बगवाल खेली, मगर कुछ अन्य लोगों का कहना है कि बगवाल खेलने वालों की संख्या दोगुनी थी। मंदिर के पुजारी धर्मानंद ने 11.30 बजे चंवर झूलाकर बगवाल समाप्त होने का संकेत किया। बगवाल पर विराम लगने के बाद चारों खामों के योद्धाओं ने कुशलक्षेम पूछने के साथ मां के सम्मुख शीश नवाया।
बगवाल शुरू होने से पहले पंडित कीर्ति बल्लभ शास्त्री और डॉ.भुवन चंद्र जोशी ने मां बाराही देवी का पूजन किया। इस मौके पर मुख्य रूप से पूर्व स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल, विधायक राम सिंह कैडा, एसडीएम आरसी गौतम, सीओ ध्यान सिंह, तहसीलदार सचिन कुमार, एसओ नारायण सिंह आदि मौजूद थे।
ये हैं चारों खाम
1. लमगड़िया खाम : मंदिर कमेटी के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, खीम सिंह लमगड़िया, आन सिंह लमगड़िया, तारा सिंह, उमेद सिंह, किशन सिंह, लाल सिंह, दीवान सिंह।
वालिग खाम : मदन सिंह, शेर सिंह, गोपाल सिंह, राजू बिष्ट।
चम्याल खाम: लाल सिंह चम्याल, बिशन सिंह, विनोद चम्याल, जगदीश सिंग्वाल, गौरव सिंग्वाल।
गहरवाल खाम : जोध सिंह बिष्ट, डुंगर सिंह बिष्ट, मोहन बिष्ट, दिनेश चम्याल, बद्री सिंह बिष्ट, खुशाल सिंह, माधो सिंह, गोपाल बिष्ट, लाल सिंह, पान सिंह आदि योद्धा थे।
बगवाल मेला घंटे-दर-घंटे:
सुबह 6: 05 बजे : पूजा-अर्चना शुरू हुई।
8:15 बजे : पूजा-अर्चना पूरी हुई।
10:15 बजे: खामों का मंदिर में प्रवेश करना शुरू हुआ।
10:45 बजे : मंदिर की परिक्रमा।
11:23 बजे : बगवाल के लिए मैदान में प्रवेश।
11:25 बजे : बगवाल का शुभारंभ।
11:30 बजे : बगवाल का समापन।
वर्ष: बगवाल का वक्त: चोटिल
2016- 7 मिनट- 59 योद्धा और 11 दर्शक
2017- 8 मिनट- 11 योद्धा और 323 दर्शक
2018- 8 मिनट- 112 योद्धा और 129 दर्शक
2019- 9 मिनट- 98 योद्धा और 24 दर्शक
2020- 5 मिनट- 3 योद्धा
पहली बार नहीं हुई यह परंपरा
पाटी/देवीधुरा। देवीधुरा बगवाल में पहली बार एक भारी-भरकम शिला (पत्थर) को उठाने की रस्म नहीं हुई। मंदिर के सम्मुख खोलीखांण दुबचौड़ा मैदान में वर्षों से डेढ़ क्विंटल से अधिक वजन का यह पत्थर रखा है। मान्यता है कि इस पत्थर को उठाने से मन्नत पूरी होती है। हर साल 70 से अधिक युवा श्रद्धालु इस पत्थर को उठाकर मैदान का चक्कर लगाते हैं। मगर पहली बार इस पत्थर को नहीं उठाने का लोगों को अफसोस है। ओखलकांडा के विनोद कुमार कहते हैं कि बीते नौ साल से वे पत्थर उठाते रहे हैं। पहली बार ऐसा नहीं कर सके।
मुचकंद ऋषि के आश्रम तक जाएगी मां ब्रज बाराही की शोभायात्रा
पाटी/देवीधुरा। बाराहीधाम देवीधुरा में बगवाल के बाद अब मंगलवार को बाराही मंदिर से मुचकंद ऋषि के आश्रम तक मां ब्रज बाराही की शोभायात्रा निकलेगी,जहां मां अपने भक्त को दर्शन देने खुद जाती है। कहा जाता है कि देवासुर संग्राम में मुचकंद ऋषि ने काल यवन राक्षस के संहार में देवताओं की सहायता की थी। इससे खुश होकर मां बाराही ने मुचकंद ऋषि को स्वयं उनके आश्रम में आकर दर्शन देेने का वरदान दिया था। तबसे हर वर्ष रक्षाबंधन के दूसरे दिन शोभायात्रा निकाली जाती है। मां बाराही का आशीर्वाद लेने वाले श्रद्धालु मुचकंद ऋषि के आश्रम में दर्शन करने अवश्य जाते हैं।
आंखों में पट्टी बांध आज होगा मां बाराही देवी की मूर्ति का स्नान
पाटी/देवीधुरा (चंपावत)। बगवाल नगरी में ढेरों रहस्य छिपे हैं। भीम शिला के अलावा मां बाराही देवी की मूर्ति भी कम हैरतंगेज नहीं है। मंदिर के गर्भगृह में एक ताम्र पेटिका में रखी मां बाराही की मूर्ति को खुली आंखों से देखने की परंपरा नहीं है। कहा जाता है कि आज तक मां ब्रज बाराही की मूर्ति को किसी भी श्रद्धालु ने नहीं देखा है। आंखों में पट्टी बांधकर पुजारी की ओर से मूर्ति को स्नान कराने की परिपाटी सदियों से चली आ रही है। बगवाल के एक दिन बाद मंगलवार को ताम्र पेटिका में रखी मूर्ति को पुजारी नेत्र बंद करके स्नान कराएंगे।
बाराही मंदिर में प्रवेश करते ही एक ताम्र पेटिका दिखती है, जिसे 52 पीठों में से एक माना जाता है। मुख्य मंदिर में तांबे की पेटी में रखी मूर्ति के दर्शन अभी तक किसी ने नहीं किए हैं। इससे यह पता नहीं चल सका कि यह मूर्ति किस धातु की बनी है। इस संबंध में दो किवदंतियां प्रचलित हैं। बताते हैं कि मां दिगंबरा शक्ति निर्वस्त्र हैं। ऐसे में किसी भी श्रद्धालु का मां को वस्त्रहीन रूप में देखना धर्म और नीति के खिलाफ है, जबकि दूसरी किवदंती के अनुसार कभी यह मूर्ति चोरी हो गई थी। मूर्ति चुराने वाली की आंखों की रोशनी चली गई थी। इसके बाद उस व्यक्ति ने देवी की मूर्ति को वापस मंदिर में रख दिया था।
मां बाराही धाम देवीधुरा में देवी मां का जयकारा करते बगवाली वीर।- फोटो : CHAMPAWAT
देवीधुरा मां बाराही धाम मंदिर परिसर में फर्रो के साथ मंदिर की परिक्रमा करते बगवाली वीर।- फोटो : CHAMPAWAT