पिथौरागढ़। सड़कों की सुरक्षा के साथ ही भू-कटाव और आपदा की घटनाओं को रोकने के लिए कलवर्ट बेहद जरूरी हैं। इसके बाद भी जिले के प्रमुख धारचूला हाईवे पर कलवर्ट बंद कर दिए गए हैं। हाईवे पर बसे सतगढ़ गांव के पास कलवर्ट बंद करने से सड़क का पानी घुसने से खेतों को नुकसान पहुंच रहा है। इससे आक्रोशित महिलाओं और अन्य लोगों ने बीआरओ के अधिकारियों का घेराव करते हुए बंद कलवर्ट खोलने और इनका निर्माण करने की मांग की।
सड़कों खासकर हाईवे और इसके आसपास बसी आबादी की सुरक्षा के लिए एक किलोमीटर की लंबाई में सात से आठ कलवर्ट निर्माण कराने का नियम है। पानी की उचित निकासी और इससे होने वाले भू-कटाव को रोकने के लिए कलवर्ट जरूरी हैं। सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण धारचूला हाईवे पर भी ये मानक पूरे थे। करीब सात साल पूर्व हाईवे के चौड़ीकरण के दौरान अधिकांश कलवर्ट बंद कर दिए गए जबकि कई स्थानों पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य कर दिया गया।
बीते दिनों सतगढ़ गांव के पास हाईवे की क्षतिग्रस्त सुरक्षा दीवार का निर्माण शुरू करते हुए बीआरओ ने खुद कलवर्ट बंद कर दिया। बीते दिनों बारिश हुई तो कलवर्ट बंद होने से सड़क का पानी खेतों में घुसने से भू-कटाव शुरू हो गया। वर्तमान में बारिश का पानी खेतों में नाले की तरह बह रहा है जिससे खेती को नुकसान पहुंच रहा है। साथ ही भविष्य में यह बड़ी आपदा का कारण भी बन सकता है। इसी डर से बुधवार को आक्रोशित महिलाओं और अन्य ग्रामीणों ने बीआरओ के अधिकारियों का घेराव कर बंद कलवर्ट को खोलने की मांग की।
उन्होंने जल्द कलवर्ट न खुलने और इनका निर्माण न होने पर सुरक्षा दीवार का काम रोककर आंदोलन करने की चेतावनी दी। वहां ग्राम प्रधान अंजू कापड़ी, हेमा, तुलसी देवी, भानी देवी, हरीश कापड़ी, दीपक, नीलाधर सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।
कोट
सुरक्षा दीवार के निर्माण के दौरान कलवर्ट बंद करना पड़ा। खेतों में पानी जाने की जानकारी नहीं है। जानकारी लेकर उचित कदम उठाए जाएंगे। - शंभू मूर्ति, द्वितीय कमान अधिकारी, बीआरओ, बरम
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किसी भी हाईवे पर एक किलोमीटर में सात या आठ कलवर्ट के निर्माण का नियम है। कलवर्ट का निर्माण सड़क, जमीन और आबादी की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है। कई बार आसपास रहने वाले खुद कलवर्ट बंद कर देते हैं। यदि कोई भी कार्यदायी संस्था कलवर्ट बंद कर लोगों की सुरक्षा को अनदेखा करती है तो यह गंभीर है। पानी की उचित निकासी नहीं होने से यह आपदा का कारण भी बन सकता है। - नवीन जोशी, सेवानिवृत्त ईई, लोनिवि