वन श्रमिकों ने हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद विभाग की ओर से नियमित नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई है। मंगलवार को वन श्रमिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सामाजिक कार्यकर्ता खिलानंद जोशी के नेतृत्व में प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) से मुलाकात कर नियमितीकरण और एक समान काम के लिए एक समान सुविधा देने की मांग उठाई। अदालत के आदेश के बावजूद नियमितीकरण नहीं किए जाने को अदालत की अवमानना बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।
चंपावत वन प्रभाग में 60 से अधिक वन श्रमिक हैं। इन श्रमिकों का कहना है कि वनों की सुरक्षा में वे सबसे ज्यादा योगदान देते हैं। दो दशक से अधिक वक्त तक काम करने के बावजूद उनका मानदेय बेहद कम है। उच्च न्यायालय ने नियमितीकरण का आदेश दिया है फिर भी उन्हें वन विभाग की ओर से आदेश का पालन नहीं किया जा रहा है।
उन्हें बमुश्किल सात हजार रुपये का मानदेय दिया जा रहा है। श्रमिकों ने अदालत के आदेश का पालन कर इंसाफ की गुहार लगाई। ऐसा नहीं होने पर आंदोलन के साथ ही फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी गई है।
डीएफओ से मिलने वालों में वन श्रमिक भोला दत्त, भुवन चंद्र चौबे, मोहन चंद्र जोशी, ऋषि दत्त, रमेश चंद्र, चंद्रशेखर, महेश जोशी, ईश्वरी भट्ट, भवान सिंह, दिनेश भट्ट, देवकीनंदन, घनश्याम जोशी, नारायण सिंह, हरि दत्त, पूरन चंद्र, इंद्र सिंह, हयात सिंह आदि थे।
वन श्रमिकों के नियमितीकरण पर वन विभाग मुख्यालय के दिशा-निर्देश के बाद ही कोई कार्यवाही संभव है। नियमितीकरण या पदोन्नति का अधिकार उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है।
कुबेर सिंह बिष्ट, प्रभागीय वनाधिकारी, चंपावत।