चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच पर स्वाला के पास लगातार पहाड़ी से बड़े-बड़े बोल्डर गिर रहे हैं। इसके चलते इस डेंजर जोन में वाहनों की आवाजाही आसान नहीं है। लगातार गिर रहे बोल्डरों और मलबे के चलते लोग जोखिम उठाकर आवाजाही करने के लिए मजबूर है।
टनकपुर-पिथौरागढ़ एनएच 106 किमी एनएच प्राधिकरण और प्रशासन के लिए मुसीबत बना हुआ है। 12 सितंबर को हुई भारी बारिश से स्वाला पर मलबा आने से यातायात चार दिन तक बाधित रहा। इस दौरान गुजरात, यूपी, दिल्ली के पर्यटकों के साथ सेना के जवान भी चार दिन तक यहां फंसे रहे।
इससे पहले जुलाई में हुई मूसलाधार बारिश से भी यहां पर यातायात बाधित रहा था। जुलाई और सितंबर में स्वाला में एनएच बंद होने से व्यापारिक और पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित रहीं। इससे व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ा था।
संवेदनशील पहाड़ी के चलते स्वाला में अब यातायात सुचारु करना आसान नहीं है। मलबा आने से बार-बार वाहनों का रोकना पड़ रहा है। इससे कई बार घंटों लंबा जाम लग रहा है।
डेंजर जोन वाली सड़क के नीचे कीचड़ होने से भी दिक्कत आ रही है। हालांकि लगातार मिट्टी भरान का काम भी किया जा रहा है। इधर आपदा प्रबंधन विभाग ने ड्रोन से डेंजर जोन का सर्वे किया। संवाद
भारी बोल्डर की चपेट में आने से बाल-बची महिला
चंपावत। डेंजर जोन पर यात्री जोखिम उठाकर आवाजाही कर रहे हैं। सोमवार को पहाड़ी से गिरा करीब 500 किलो का बोल्डर पश्चिम बंगाल की एक महिला की कार के ठीक ऊपर से गुजर गया। गनीमत रही बोल्डर वाहन पर नहीं गिरा। यह मंजर देखकर वहां मौजूद लोगों के हाथ पांव फूल गए थे। पैदल आवाजाही भी आसान नहीं हो रही है। संवाद
कोट
- स्वाला में यातायात सुचारू करने में दिक्कत हो रही है। 150 मीटर ऊपर पहाड़ी से लगातार बोल्डर गिर रहे हैं। ऐसे में वाहनों की आवाजाही कराना आसान नहीं हो रहा है। दो स्थानों पर डेंजर जोन बना हुआ। इसके अलावा इस जगह पर सड़क के नीचे कीचड़ होने से भी दिक्कत आ रही है। मौसम साथ देता है तो इसका मरम्मत कार्य शुरू किया जाएगा। - एनसी टम्टा, एई, एनएच।