निर्माणाधीन बारहमासी मार्ग में खतरे का सबब बन रहे हैं खुदे कलवर्ट
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारहमासी मार्ग पर खोखली जड़ वाले पेड़ और अटके पत्थर ही खतरे नहीं बने हैं बल्कि अनेक स्थानों पर कलवर्ट निर्माण के दौरान सुरक्षा के उपाय भी ठीक से नहीं किए गए हैं।
150 किलोमीटर लंबे बारहमासी मार्ग पर इस वक्त दो दर्जन जगहों पर कलवर्ट का निर्माण किया जा रहा है। इनमें से मानेश्वर, सूखीढांग सहित सात स्थानों पर सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं।
क्रास टेप की कमी के अलावा खतरे को जताने वाले साइनबोर्ड नहीं लगाए गए हैं। इससे बारिश और धुंध में सड़क भी साफ नजर नहीं आती है। इन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले ग्रामीण ऐसी जगहों में पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध करते रहे हैं। एनएच खंड के अधिशासी अभियंता एलडी मथैला का कहना है कि अधिकतर निर्माणाधीन कलवर्ट में सुरक्षा के पर्याप्त उपाय किए गए हैं। इसके बावजूद जरूरत के हिसाब से बचाव के प्रबंध किए जाएंगे।
खतरे वाले चिन्हित पेड़ों को प्रशासन को भेजेगा वन विभाग
बारहमासी मार्ग पर चंपावत जिले के अंतर्गत टनकपुर से घाट तक 746 पेड़ों को खतरे के दायरे में चिन्हित किया गया है। वन, राजस्व और एनएच की टीम ने सर्वे कर इन पेड़ों को चिन्हित किया है। प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट का कहना है कि खतरे वाले पेड़ों को चिन्हित किए जाने की पत्रावली अभी उनके पास नहीं पहुंची है। इस पत्रावली को डीएम को भेजा जाएगा ताकि आपदा अधिनियम के तहत इनका निस्तारण किया जा सके।