डांडा और ककनई गांव वे गांव हैं जहां न सड़क है और न ही कोई संचार का साधन। डिजिटल इंडिया का सपना गांव के लिए बेगाना है। सड़क नहीं होने से यहां से बाहर नहीं गए बुजुर्गों ने आज तक बस, कार या बाइक तो दूर साइकिल तक नहीं देखी है। सड़क नहीं होने से यहां की जिंदगी महंगाई के बोझ तले और ज्यादा झुक गई है। गांव के लोग सड़क, संचार के अलावा शौचालय और स्वास्थ्य सुविधाओं से भी वंचित है।
करीब 1800 की आबादी वाले डांडा और ककनई गांव पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय से सूखीढांग तक 55 किलोमीटर पक्की सड़क और यहां से करीब 26 किमी बुड़म तक कच्ची सड़क से चलने के बाद 16 किमी पैदल दूरी नापनी पड़ती है। सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह बोहरा का कहना है कि इस पूरी यात्रा में करीब दो दिन लग जाते हैं। लोगों को बुड़म से गांव तक सामान लाने में खच्चर के भाड़े के रूप में प्रति क्विंटल सामान पर 400 रुपये खर्च करना पड़ रहा है। अधिकांश सामान पर बाजार की कीमत से ज्यादा भाड़ा लगता है। सीमेंट के 350 रुपये का कट्टा गांव तक पहुंचते-पहुंचते भाड़े के साथ 750 रुपये का पड़ जाता है। सड़क की कमी गांव की खेतिहर उपज पर भी भारी पड़ रही है।
चंपावत जिले में 4जी शुरू हो गया है, लेकिन डांडा, ककनई, बुड़म आदि गांवों में 4जी तो दूर 2जी भी नहीं है। इन गांवों में मोबाइल टावर ही नहीं है और न किसी मोबाइल टावर के सिगनल यहां तक पहुंच पाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सिंह बोहरा का कहना है कि यहां के लोगों को टनकपुर स्थित बैंक तक पहुंचने में ही दो दिन लग जाते हैं। ग्राम प्रधान खष्टी देवी बताती हैं कि 16 किमी पैदल रास्ते के बाद सड़क मार्ग से करीब 50 किलोमीटर का सफर करने के बाद टनकपुर के बैंकों तक पहुंचना पड़ता है।
लीड बैंक प्रबंधक आनंद सिंह रावत का कहना है कि आबादी कम होने से फिलहाल डांडा सहित आसपास बैंक खोले जाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मोबाइल टावर की ग्रामीणों द्वारा कई बार मांग करने के बावजूद इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।
स्वास्थ्य उप केंद्र भवन में पुलिस चौकी
स्वास्थ्य की कोई सुविधा यहां उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण बताते हैं कि डांडा में एक उप केंद्र जरूर है, लेकिन यह नामभर का है। इस उप केंद्र में भी पुलिस की चौकी बनी हुई है। एएनएम की तैनाती भी नहीं की गई है, जिस कारण यहां टीकाकरण भी नियमित रूप से नहीं हो पाता है। सीएमओ डॉ. एमएस बोहरा का कहना है कि टीकाकरण के लिए दूसरे केंद्र से टीम भेजी जाती है।
दो महीने पूर्व ही गांव में आई बिजली
डांडा गांव में दो माह पूर्व तक बिजली नहीं थी। अप्रैल में इस गांव को बिजली से जोड़ा जा सका। फिलहाल एक कनेक्शन दिया गया है। बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता आरसी पंत का कहना है कि यहां 30 कनेक्शनों के लिए आवेदन किया गया है। जल्द ही ये घर रोशन हो जाएंगे।
सड़क का प्रस्ताव भेजा
डांडा तक की सड़क को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में प्रस्तावित किया गया है। पीएमजीएसवाई डिवीजन के अधिशासी अभियंता एके वर्मन का कहना है कि टकनागूठ से डांडा मल्ला तक 16 किमी मोटर मार्ग प्रस्तावित किया गया है। मुख्य अभियंता को इस बाबत प्रस्ताव भेजा गया है।
काेट
डांडा ग्राम पंचायत की ज्यादातर नेता अनदेखी करते हैं। जरूरी सुविधाओं को लेकर बीडीसी की बैठकों सहित विभिन्न मंचों से लगातार आवाज उठाई जाती रही है, लेकिन यह मांगे अनसुनी रह जाती है। सड़क, संचार और स्वास्थ्य सुविधा गांव के लिए बेहद जरूरी है। इन मांगों को फिर से तहसील दिवस और बीडीसी बैठक में उठाया जाएगा।
- खीमा देवी, ग्राम प्रधान, डांडा।