धार्मिक आस्था के केंद्र बाबा ब्यानधूरा मंदिर में देव मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा के साथ मकर संक्रांति पर्व पर आयोजित होने वाला तीन दिनी मेला संपन्न हो गया। मेले में 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने करीब 15 किलोमीटर की कठिन खड़ी चढ़ाई पार कर बाबा ब्यानधूरा के दर्शन किए। इस बीच दिन और रात घने जंगलों के बीच तीर्थयात्रियों की आवाजाही बनी रही। मुख्य मंदिर परिसर और जंगली रास्ते में तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए पुलिस का इंतजाम किया गया था।
ब्यानधूरा मंदिर समिति के शंकर दत्त जोशी ने बताया कि समिति ने श्रद्धालुओं को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराईं। मंदिर में साल दर साल यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण रात्रि में यहां रुकने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सेनापानी में चंपावत के शिव शक्ति सेवा संघ ने भंडारा लगाने के साथ तीर्थयात्रियों को आवासीय सुविधाएं मुहैया कराईं।
डिप्टेश्वर महादेव मंदिर के महंत बालयोगी ज्योतिदास के नेतृत्व में आयोजित भंडारे में नगरपालिका अध्यक्ष विजय वर्मा, व्यापार मंडल अध्यक्ष अमरनाथ सक्टा, विपिन पांडेय, हिम्मत सिंह, गौरव पांडेय, गोविंद जोशी, गणेश महराना, एलएल वर्मा, योगेश जोशी, सुनील कार्की, लोकेश पांडेय, रोहित तड़ागी, नाथ सिंह, राजेंद्र गड़कोटी आदि ने सहयोग किया।
देवडांगरों ने किया पीड़ितों का समाधान
चंपावत। ब्यानधूरा में मकर संक्राति की पूर्व संध्या में आयोजित जागरण में विभिन्न स्थानों से देवडांगरों ने अवतरित होकर कई पीड़ितों की समस्याओं का समाधान किया। ब्यानधूरा में लगने वाला मेला पूरी तरह से धार्मिक मेला होता है जिसमें देव बाधाओं से पीड़ित लोग न्याय मांगने के लिए बाबा ब्यानधूरा की शरण लेेते हैं। देवडांगरों के आशीर्वाद के बाद पीड़ित लोग अगले साल आने का वादा कर अपने अपने घर चले गए।
कई स्थानों पर किया गया भंडारे का आयोजन
चंपावत। जिले के शिव शक्ति सेवा संघ के अलावा विभिन्न संगठनों ने सेनापानी-ब्यानधूरा मार्ग पर कई स्थानों पर तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए भंडारे का आयोजन किया जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रतिभाग किया। सेनापानी में सितारगंज-नानकमता और थारू परिषद की ओर से भंडारा लगाया गया। लोहाघाट और बनबसा के लोगों ने भी मेेले में तीन दिनों तक भंडारे का आयोजन किया।