फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या जिंदगी का ठिकाना, फिरत मन क्यों रे भुलाना...

विज्ञापन
होली गीत गाते पाटी मष्टा संगीत कला समिति के लोग। - फोटो : CHAMPAWAT
विज्ञापन
पौष मास शुरू होने के साथ ही बैठकी होली की धूम मच गई है।
विज्ञापन

मष्टा संगीत कला समिति की ओर से सीएस मौनी के आवास पर शास्त्रीय संगीत पर आधारित होली गीतों का गायन हुआ। कार्यक्रम का श्रीगणेश समिति के संरक्षक एमएन पचौली ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सीएस मौनी ने भक्तिरस के गीत ‘भव भंजन गुण गाऊं, मैं अपने राम को रिझाऊं...’ से होली गायन की शुरुआत की।
कैलाश भट्ट ने राग काफी में ‘क्या जिंदगी का ठिकाना, फिरत मन क्यों रे भुलाना’, कृष्णानंद पचौली ने ‘भजो मन कृष्ण कन्हैया गिरधारी’, एमएन पचौली ने राग जंगला काफी में ‘कैसी बंशिया बजायी घनश्याम’, पंकज पचौली ने ‘गणपति को भज लीजै, रसिक वह आदि कहावै’, आचार्य ललित सौराड़ी ने ‘अबकी बेर हमारी लाज राखो गिरधारी’ और बद्रीदत्त पचौली ने ‘भजो मन कृष्ण कन्हैया गिरधारी’ गीत पेश किए। तबले पर संगत केसी भट्ट और बद्रीदत्त पचौली ने दी। वहां मनीषा सौराड़ी, हिमानी भट्ट, प्रियंका, अंजलि मौनी, दीपिका लडवाल, कंचन, गौरव आदि थे।
विज्ञापन

नदिया किनारे मेरा गांव...
चंपावत। कलश संगीत कला मंच समिति की ओर से उत्तरांचल संगीत व कला सभागार में हुई बैठकी होली में होल्यारों ने शानदार प्रस्तुति दी। सेवानिवृत्त शिक्षक धर्म सिंह अधिकारी ने राग काफी में ‘भव भंजन गुण गाऊं...’, संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य उमापति जोशी ने राग काफी में ‘नील वर्ण घनश्याम...’, पूर्व ग्राम प्रधान शांति जोशी ने राग पीलू में ‘नदिया किनारे मेरा गांव...’ और गिरीश चंद्र पंत ने राग श्याम कल्याण में ‘बहुत दिनन के रूठे श्याम को होली में मना लाऊंगी’...गीत पेश कर महफिल में धूम मचा दी।
विज्ञापन

इसके अलावा हर्षवर्द्धन पांडेय, अभिषेक पांडेय, मनीषा भट्ट ने भी होली गीत सुनाए। तबले में संगत संजय जोशी, दिनेश जोशी व शांति जोशी ने दी। इस मौके पर प्रवक्ता सामश्रवा आर्य, संजय पांडेय, हेम खर्कवाल, चेतन पंत, मुन्ना गोस्वामी, सुरेश जोशी, नंदाबल्लभ आदि ने होली गीतों का लुत्फ उठाया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें