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राम दिल को न तोड़ो बुरी बात है, सब बना खेल मेरा बिगड़ जाएगा

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लोहाघाट की रामलीला में अंगद का पैर उठाने का प्रयास करते राक्षस। - फोटो : LOHAGHAT
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जिले के विभिन्न स्थानों पर इन दिनों रामलीला की धूम मची है। चंपावत के मल्लीहाट, फुलारागांव, सैंदर्का, स्वांला, कर्णकरायत और लोहाघाट में रामलीला मंचन जारी है। स्वांला में सूर्पणखा नासिका छेदन की लीला का मंचन किया गया। यहां सूर्पनखा ने राम दिल को न तोड़ो बुरी बात है, सब बना खेल मेरा बिगड़ जाएगा गीत गाकर राम को रिझाने का प्रयास किया।
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आयोजन में रामलीला कमेटी अध्यक्ष जगदीश भट्ट, व्यवस्थापक ईश्वरी दत्त भट्ट, तुलसी दत्त भट्ट, दिनेश भट्ट आदि सहयोग कर रहे हैं। भिंगराड़ा में कलाकारों ने दशरथ कैकई संवाद का शानदार मंचन कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। लीला निर्देशक कृष्ण चंद्र भट्ट, सतीश, कमेटी अध्यक्ष गिरीश चंद्र भट्ट, कोषाध्यक्ष धर्मानंद भट्ट, प्रकाश कुंवर, रमेश चंद्र भट्ट आदि आयोजन में सहयोग कर रहे हैं। यहां केकैई का अभिनय रमेश चंद्र भट्ट, दशरथ का चंद्रशेखर जोशी, मंथरा का मोहन जोशी, राम का हिमांशु भट्ट, सीता का दीपक कुंवर, लक्ष्मण का घनश्याम भट्ट और सुमंत का अभिनय महेश भट्ट निभा रहे हैं।
लोहाघाट में चल रही 119 वर्ष की रामलीला में अंगद-रावण के पात्रों ने जीवंत अभिनय कर दर्शकों को अपना मुरीद बना लिया। कमेटी के अध्यक्ष जीवन मेहता की अध्यक्षता और विपिन वर्मा के निर्देशन में लीला के नौवें दिन मंदोदरी-रावण संवाद, विभीषण के समझाने के बाद रावण की ओर से उसे लंका से बाहर निकालना, विभीषण का राम दल में शामिल होना, अंगद का दूत बनकर रावण दरबार में पहुंचना, अंगद-रावण संवाद का मंचन हुआ। रावण कहता है सिया को दे दो सिया को दे दो जुबां क्यों बंदर चला रहा है।
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अंगद कहता है मैं जानू बल तोर रावण, सीता लाये चोर, अंगद नाम मेरो बालि कर बेटा की प्रस्तुति बेहद सराही गई। रावण के पात्र आशीष वर्मा और अंगद के पात्र नवीन बोहरा के अभिनय का दर्शकों ने तालियों से स्वागत किया। लीला में मेघनाद-लक्ष्मण संवाद, लक्ष्मण शक्ति लगना, राम का विलाप करना, हनुमान के संजीवनी बूटी लाने तक की लीला का मंचन किया गया।
रामलीला के आयोजन में प्रहलाद मेहता, मुकेश साह, प्रकाश पुनेठा, जीवन गहतोड़ी, आनंद पुजारी, अमित साह, संजय फत्र्याल, दीपक सुतेड़ी, ईश्वरी साह, विनोद गोरखा, सतीश राजन, त्रिभुवन कोठारी, हरीश मेहता, हेमंत पांडेय, किशोर चतुर्वेदी आदि सहयोग कर रहे हैं।
15 सालों से कैकई का अभिनय कर रहे हैं रमेश चंद्र भट्ट
चंपावत। जिले में वर्तमान में नई पीढ़ी में रामलीला मंचन और अभिनय को लेकर खास आकर्षण नहीं दिखता है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी रामलीला मंचन की प्रासंगिकता न सिर्फ बनी हुई है बल्कि आज भी ऐसे कई कलाकार हैं जो लंबे समय से रामलीला के विभिन्न पात्रों का अभिनय बड़ी शिद्दत से निभाते आ रहे हैं। ऐसे ही कलाकारों में शामिल हैं भिंगराड़ा के रमेश चंद्र भट्ट जो बीते 15 सालों से भिंगराड़ा रामलीला में कैकई का अभिनय करते आ रहे हैं।
रमेश चंद्र भट्ट केवल कैकई ही नहीं रामलीला के अन्य किरदारों का अभिनय भी बखूबी निभाते आ रहे हैं। रामलीला में अभिनय करने से मिली लोकप्रियता का आलम ये है कि रमेश चंद्र भट्ट को इस बार भिंगराड़ा के ग्रामीणों ने पंचायती चुनाव में निर्विरोध ग्राम प्रधान चुना है। वह कहते हैं कि जब वह कैकई की भूमिका में रामलीला मंच पर होते हैं तब उन्हें एक अलौकिक शक्ति मिलने का एहसास होता है। वह रामलीला के आयोजन के दौरान खान-पान की शुद्धता के साथ ही मानसिक रूप से सात्विक तरीके से रहते हैं।

लोहाघाट की रामलीला में रावण द्वारा लंका से निकाले जाने के बाद श्रीराम की शरण में आया विभीषण।- फोटो : LOHAGHAT

चंपावत के स्वांला रामलीला में राम को रिझाती सूर्पणखा।- फोटो : CHAMPAWAT

चंपावत के भिंगराड़ा रामलीला में कैकई मंथरा के बीच संवाद का दृश्य।- फोटो : CHAMPAWAT

चंपावत के मल्लीहाट की रामलीला में वनवास को जाते भगवान राम, सीता और लक्ष्मण।- फोटो : CHAMPAWAT

चंपावत के मल्लीहाट की रामलीला में राजा दशरथ को वनवास वापस लेने के लिए मनाते भरत।- फोटो : CHAMPAWAT

रमेश चंद भट्ट, सिंगल कालम।- फोटो : CHAMPAWAT

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