मां बाराही धाम देवीधुरा में ऐतिहासिक और पौराणिक बगवाल मेले का शुभारंभ हो गया है। रविवार को 15 दिवसीय मेले का श्रीगणेश मुख्य अतिथि डोल आश्रम के संत श्री 1008 कल्याणदास जी महाराज ने किया। उन्होंने इस धार्मिक मेले को लोक आस्था और विरासत का अनूठा समागम बताया। कहा कि इस मेले को और अधिक विस्तार देने में डोल आश्रम सहयोग करेगा।
मुख्य अतिथि ने चार खाम (लमगड़िया, चम्याल, वालिग और गहरवाल) और सात तोकों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मां बाराही देवी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की। मेले का मुख्य आकर्षण फूल और फलों से खेली जाने वाली बगवाल रक्षाबंधन के दिन 15 अगस्त को होगी। स्कूली बच्चों और बालिकाओं ने परंपरागत वेशभूषा में हनुमान मंदिर से मां बाराही मंदिर तक झांकी निकाली। शानदार छोलिया नृत्य भी पेश किया गया। संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों ने आचार्य विपिन जोशी के नेतृत्व में वेदपाठ किया।
जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल सिंह अधिकारी की अध्यक्षता और मंदिर के पीठाचार्य बीसी जोशी एवं पंडित कीर्ति बल्लभ जोशी के संचालन में हुए समारोह में मुख्य अतिथि का भव्य स्वागत किया गया।
जिला पंचायत अध्यक्ष ने मेले के आयोजन के लिए सरकारी मदद का आग्रह किया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और जागेश्वर विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने आस्था के इस प्रसिद्ध मेले को और अधिक भव्य स्वरूप देने पर जोर दिया। समिति के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने कहा कि साधनों के अभाव के बावजूद मेले की आध्यात्मिकता को बचाए रखते हुए भव्यता दी जा रही है।
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चारों खामों की मौजूदगी में हुआ सांगी पूजन
पाटी (देवीधुरा)। मां बाराही धाम देवीधुरा में बगवाल मेले के शुभारंभ के वक्त सांगी पूजन हुआ। चार खाम और सात तोकों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मंदिर के मुख्य पुजारी धर्मानंद, जगदीश चंद्र, संस्कृत महाविद्यालय के आचार्य कीर्ति बल्लभ जोशी के मंत्रोच्चारण के साथ सांगी पूजन हुआ। इस मौके पर लमगड़िया खाम के वीरेंद्र सिंह लमगड़िया, वालिग खाम के बद्री सिंह, दिवान सिंह बिष्ट, चम्याल खाम के गंगा सिंह, गहड़वाल खाम के बद्री सिंह, खुशाल सिंह, त्रिलोक सिंह, पान सिंह, माधो सिंह बिष्ट, शिव सिंह चौहान, लाल सिंह चम्याल आदि थे। ब्यूरो
उद्घाटन में ये रहे मौजूद
महामंडलेश्वर गोरक्ष बाबा स्वामी जगदीशानंद जी, स्वामी विश्वेश्वरानंद जी, स्वामी धर्मानंद जी, स्वामी वीरेंद्रनाथ जी, स्वामी गोपाल दास जी, नरेंद्र सिंह लडवाल, दिनेश जोशी, दिनेश कुंजवाल, उत्तम देऊ, भगीरथ भट्ट, विनोद गड़ाकोटी, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया, महामंत्री हयात सिंह बिष्ट, जीत सिंह, रमेश राणा, दीपक चम्याल, दीपक सिंह, जगदीश सिंगवाल, रोशन लमगड़िया, कविराज मौनी, दान सिंह राणा, बहादुर नगदली, मेला मजिस्ट्रेट शिप्रा जोशी, मेलाधिकारी राजेश कुमार, भगवत पाटनी, बीडीओ डॉ. अमित ममर्गाइं।
देवीधार बगवाल मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
पाटी (देवीधुरा)। देवीधार बगवाल मेले के शुभारंभ के साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शुरू हो गए हैं। लोहाघाट के प्रदीप कुमार की टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए। जै हो मैय्या तेरी जै होवे..., देवी भगवती मैय्या देवधरे की दैवी मैय्या दैण हो जाए... सहित कई भजन पेश किए गए।
सन्मार्ग को आध्यात्मिक मार्ग पर चलना जरूरी : संत कल्याण दास
पाटी (चंपावत)। डोल आश्रम के संत श्री 1008 कल्याणदास जी महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक मार्ग पर सोचा नहीं, बल्कि चला जाता है। कहा कि प्रमुख शक्तिपीठ मां बाराही मंदिर को और भव्य रूप प्रदान किया जाएगा। देवीधुरा मंदिर परिसर में जमीन की तलाश कर इस कार्य को आगे बढ़ाया जाएगा। कहा कि शक्ति का यह पीठ धर्म व अध्यात्म के संरक्षण के संरक्षण के साथ ही समाज के सुधार के लिए भी जरूरी है।
झोड़ा-चांचरी का संरक्षण जरूरी : कुंजवाल
पाटी (चंपावत)। उत्तराखंड विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि अध्यात्म के इस एतिहासिक मां बाराही धाम को राष्ट्रीय मंच पर लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत है। पहाड़ की परंपराओं और संस्कृति को संरक्षित करने के लिए झोड़ा-चांचरी जैसी कलाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ताकि नई पीढ़ी इस संस्कृति से विमुख न हो सके।
देवीधुरा में मां बाराही धाम मेले का रिबन काटकर शुभारंभ करतें डोल आश्रम के स्वामी श्री 1008 कल्याणी ?- फोटो : CHAMPAWAT