ठंड में ग्लेशियरों के जमने से शारदा का जल स्तर कम हो जाता है, जिसका फायदा उठाते हुए तस्कर गिरोह हवा भरे वाहनों के ट्यूबों के सहारे तस्करी का धंधा करने लगते हैं। हंटिंग के लिए शिकारी भी ठंड के मौसम को अनुकूल मानते हैं, नतीजतन ठंड में तस्करों और शिकारियों की घुसपैठ का खतरा बढ़ जाता है।
भारत-नेपाल सीमा पर बहने वाली शारदा दोनों देशों का सीमांकन करने के साथ ही सुरक्षा दीवार का भी काम करती है। नदी में जल स्तर बढ़ा रहता है तो चोर रास्तों से संदिग्धों की घुसपैठ नहीं होती है, लेकिन जल स्तर घटते ही शिकारी और तस्कर गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे कई अवैध रास्ते हैं जो तस्करों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। बताते हैं कि अक्तूबर से अप्रैल के बीच घुसपैठ का खतरा अधिक रहता है।
ठंड में नदी किनारे कोहरे का फायदा उठाकर तस्कर सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बचकर आसानी से निकल भागते हैं। इन दिनों चोर रास्तों से जहां नेपाल की खुकरी सिगरेट नेपाल से भारत तो भारत से गरम कपड़ों की खेप हवा भरे ट्यूबों के सहारे नदी आर-पार कर बड़ी मात्रा में नेपाल पहुंचाई जा रही है।
छह हजार क्यूसेक है शारदा का जलस्तर
बरसात के मौसम में पांच लाख क्यूसेक से अधिक तक पहुंचने वाला शारदा का जलस्तर इन दिनों 6 हजार क्यूसेक के आसपास है। बैराज कंट्रोल रूम के मुताबिक बृहस्पतिवार को नदी में 6394 क्यूसेक पानी था।
हर बीओपी को दिए हैं निगरानी के निर्देश
एसएसबी के कमांडेंट केसी राणा का कहना है कि फोर्स को चोर रास्तों पर विशेष निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। उत्तराखंड में बनबसा बॉर्डर ही इकलौता वैधानिक मार्ग है, शेष रास्तों से होने वाली आवाजाही गैर कानूनी है। बनबसा से लेकर बूम तक एसएसबी की हर बीओपी चेकपोस्ट को निगरानी रखने को कहा गया है।