पीपीपी मोड में संचालित अस्पताल में एक बार फिर से अमानवीयता की हदें पार कर दी गई। अस्पताल में प्रसव पीड़ा से कराह रही प्रीति बोहरा उर्फ प्रियंका पर किसी को तरस नहीं आया। प्रसव वेदना झेल रही महिला के लिए तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त रीता गहतोड़ी काफी मददगार साबित हुई, जिनके हस्तक्षेप के बाद महिला को पिथौरागढ़ रेफर करने के लिए आपात 108 वाहन बुलाया गया, लेकिन 108 वाहन का इंतजार करते हुए महिला ने अस्पताल में ही बच्चे को जन्म दे दिया।
प्रीति को बृहस्पतिवार सुबह साढ़े आठ बजे उसके परिजन अस्पताल ले आए थे, लेकिन अस्पताल में महिला डॉक्टर का कोई अता-पता नहीं था। बड़ी मुश्किल से एक नर्स प्रीति को देखने के लिए आई। उसने देखते ही महिला को पिथौरागढ़ ले जाने को कहा। इसी बीच तीलू रौतेली पुरस्कार प्राप्त रीता गहतोड़ी आतिशबाजी से घायल बच्चों की सुध लेने आई तो उन्होंने अस्पताल के बाहर दर्द दे कराह रही प्रियंका को देखा। उन्होंने तत्काल सीएमएस डॉ. मंजीत सिंह को इसकी जानकारी दी। डॉ. सिंह अस्पताल में आए और उन्होंने महिला को रेफर करने के लिए 108 की व्यवस्था कराई। इसी दौरान इंतजार करते हुए महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।
वहीं, रीता का कहना है कि इस दौरान कई बार ऐसे क्षण भी आए जब महिला के जेठ राजेंद्र बोहरा सहित परिजनों ने उसके बचने की उम्मीद ही छोड़ दी थी। महिला के जेठ राजेंद्र बोहरा का कहना है कि वह आर्थिक तंगी के कारण प्रीति को अन्यत्र ले जाने में असमर्थ थे तथा उन्हें 108 की सेवा भी नहीं दी जा रही थी। रीता के आने के बाद पाटी से 108 सेवा तब आई, जब महिला का प्रसव हो गया था।