चंपावत। टनकपुर से पिथौरागढ़ के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग में होने वाली अधिकांश सड़क दुर्घटनाएं विभिन्न त्यौहारों और पर्व के आसपास ही घटित होती रही है। शनिवार को छतकांडा में हुई बोलेरो वाहन दुर्घटना में मारे गए चार लोगों के धरों में दो दिन बाद होने वाले हरेला पर्व की खुशियां फीकी हो गई हैं।
इससे पूर्व वर्ष 2008 में हरेला पर्व के दौरान अमरूबैंड के समीप रोडवेज बस के उपर गिरे विशालकाय बोल्डर की चपेट में आने से बस में सवार 17 यात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके अलावा नवंबर 1985 में स्वांला और खेतखोला के बीच हुए ट्रक दुर्घटना में आठ लोग मारे गए थे। यह सभी लोग स्वांला में रामलीला पर्व में प्रतिभाग कर घर लौट रहे थे। ट्रक चालक ने इस दौरान 25 ग्रामीणों को अपने केबिन में चढ़ा लिया था।
वाहन कुछ ही दूरी तय करने के बाद खेतखोला में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। वर्ष 2017 के पहले दिन भी जिले में जबर्दस्त सड़क दुर्घटना हुई। सीमांत मडलक में एक जीप के करीब 300 फीट गहरी खाई में गिरने से छह लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा 10 अन्य लोग घायल हो गए थे। इसके अलावा हिंदू नव वर्ष 2074 के पहले दिन भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर धौन-स्वांला के बीच हुए हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी।
मोबाइल का प्रयोग दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण
चंपावत। शनिवार को छतकांडा में हुई बोलेरो वाहन दुर्घटना का कारण वाहन का तेज गति में होना रहा हो। लेकिन सड़क दुर्घंटनाओं का एक बड़ा कारण अब मोबाइल फोन भी बनता जा रहा है। अधिकांश चालक यातायात के सामान्य नियमों का पालन भी नहीं करते हैं। इस मामले में कुछ दिनों पूर्व ही उच्च न्यायालय नैनीताल की ओर से वाहन चलाते समय चालकों के मोबाइल फोन के प्रयोग पर भारी भरकम चालान करने के निर्देश दिए गए हैं। जिसके बाद पुलिस की ओर से चालकों को जागरूक किया जा रहा है। बावजूद इसके वाहन चालक वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का प्रयोग करने से बाज नहीं आ रहे हैं।