चंपावत। मंदिरों और आध्यात्मिक मेलों की बहुतायत वाले देवभूमि जिले में कोरोना महामारी ने ग्रामीण धार्मिक गतिविधियों पर ब्रेक लगाया है। छह माह में जिले में तीन सबसे बड़े आध्यात्मिक मेलों समेत सात छोटे मेले-महोत्सव स्थगित हो चुके हैं। इन मेलों में हर साल 105 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार प्रभावित हुआ है। इनमें दुकान, पूजन-सामग्री, टैक्सी, होटल कारोबारी आदि शामिल हैं। कई ऐसे लोग हैं, जिनके लिए ये मेले सालभर की आय का जरिया भी थे।
इस बार 11 मार्च से शुरू मां पूर्णागिरि धाम का मेला 97 दिन के बजाय सिर्फ आठ दिन ही चला। रीठा साहिब का जोड़ मेला, देवीधुरा का भिंगराड़ा एड़ी बालकृष्ण मेला, गुमदेश का चैतोला मेला, सुंई-बिशुंग का वायुरथ महोत्सव, अखिलतारिणी मेला, रमक मेला भी प्रभावित हुआ है। इन मेलों में 35 लाख से अधिक श्रद्धालु उमड़ते हैं। मेले निरस्त होने से चार हजार से अधिक लोगों का सीजनल रोजगार प्रभावित हुआ है। इन दिनों चल रहे नंदाष्टमी महोत्सव, गौरा महोत्सव को सुरक्षित दूरी के साथ बेहद सादगी से मनाया जा रहा है। इस कारण इन मेलों में न दुकानें लगी हैं और न ही कोई कारोबारी गतिविधियां हुई हैं। पुरोहित, देव डांगर से लेकर कारोबारी, श्रद्धालु भी ऐसा ही मानते हैं।