लोहाघाट (चंपावत)। कोरोना महामारी का साया नेपाल सीमा से लगे मडलक में होने वाले बग्वाली मेले पर भी पड़ गया है। इस वर्ष मेले में न तो देव रथयात्राएं निकलेंगी और न ही कोई जत्थे। परंपरा का निर्वहन करते हुए बग्वाली के दिन पूजा, अर्चना की जाएगी। यह निर्णय मेला कमेटी की बैठक में लिया गया।
देवी मंदिर समिति के अध्यक्ष पवन कुमार जोशी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बग्वाली मेले को लेकर चर्चा की गई। जिला प्रशासन और भगवती के देव डांगर शीशपाल सिंह, खीम सिंह धामी, खीमा देवी, गंगा दत्त पांडेय, लक्ष्मी दत्त आदि की सहमति से सर्वसम्मति से 16 नवंबर को होने वाले भैयादूज (बग्वाली) मेले में ग्राम पंचायत बगोटी, मजपीपल, मडलक पांडेय से देवी रथ यात्राएं नहीं निकलेंगी, वहीं ग्राम पंचायत गुरेली, सेलपेडू, सल्ला से देवी जत्थे नहीं आएंगे। अध्यक्ष पवन का कहना है कि कोरोना महामारी को देखते हुए प्रशासन के निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाएगा। मेले के दिन मंदिर में पूजा, अर्चना कर परंपरा को निभाया जाएगा। इस मौके पर शंकर दत्त पांडेय, देव सिंह धौनी, धर्मानंद पांडेय, संतोक सिंह रावत, कमलाकांत पंत, आनंद जोशी, हरीश चंद्र, महेंद्र सिंह, बद्री सिंह, मिलाप सिंह, पूरन पंत, हरी सिंह, पूरन चंद्र लोहनी, भुवन भट्ट, भीम पंत, गणेश सिंह आदि रहे।