एडीएम हेमंत कुमार वर्मा ने वन विभाग के अधिकारियों से कहा है कि वनाग्नि रोकने के लिए जिले में स्थापित 780 वन पंचायतों का सहयोग लेने के साथ लोगों में जन जागरूकता बढ़ाने के प्रयास करें। शनिवार को जिला सभागार में वनाग्नि रोकने संबंधी बैठक में उन्होंने कहा कि वन्य जीवों को बचाने और उनकी प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने के लिए लोगों में जागरूकता जरूरी है।
उन्होंने जिले में व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर वनाग्नि से होने वाले नुकसान के बारे में बताने को कहा। प्रभागीय वनाधिकारी केएस बिष्ट ने बताया कि जिले में चीड़ के 370 वन क्षेत्रों में आग लगने की संभावना पर फायर लाइन की सफाई करने के साथ वॉच टावर बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जंगलों को आग से सामूहिक प्रयासों से ही बचाया जा सकता है। इस अवसर पर परियोजना निदेशक डीआरडीए एचजी भट्ट डीडीओ आरसी तिवारी, एसएसबी के सहायक कमांडेंट नितिन शर्मा, डीएलएम डीएन दास, एसडीओ एमएस सेमिया, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी जीडी पांडेय, डीएमओ मनोज पांडेय के अलावा लोनिवि, पीएमजीएसवाई के अभियंता, वन क्षेत्राधिकारी आदि उपस्थित थे।
बीते साल वनों में आग लगने की हुई थी 34 घटनाएं
चंपावत। डीएफओ ने कहा कि वनाग्रि को लेकर 64740.75 हेक्टेयर वन क्षेत्र संवेदनशील है। बीते साल आरक्षित क्षेत्र में 20 तथा पंचायती एवं सिविल वनों के 14 अग्नि घटनाएं हुई थी। जिससे आरक्षित वन का 31.90 हेक्टेयर तथा पंचायती व सिविल वन के 18.50 हेक्टेयर नुकसान हुआ। उन्होंने बताया कि वनाग्रि को रोकने के लिए 158 फील्डकर्मी, 69 दैनिककर्मी तथा 1761 फायर वाचर तथा वायरलेस सैट तैनात किए जा रहे हैं।