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पांच साल से बंद पड़ा है आवासीय परिसर का निर्माण कार्य 

Sun, 25 Jun 2017 10:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
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अधर में लटका आवासीय कालोनी का निर्माण कार्य - फोटो : अमर उजाला
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 जिला मुख्यालय में 2012 से शुरू जिला अस्पताल के स्टाफ के लिए आवासीय व्यवस्था बदहाल है। स्टाफ के आवासीय परिसर का काम पांच साल से अधिक वक्त से बंद पड़ा हुआ है। आवास नहीं होने से डॉक्टरों और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ को अस्पताल से दूर किराए में मकान लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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जिला अस्पताल के डॉक्टरों और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ के लिए आवास की कायदे की व्यवस्था नहीं है।  अस्पताल परिसर में कालोनी का निर्माण अधूरा रहने से डॉक्टरों की परेशानी बढ़ी है। साथ ही भवन की लागत में भी जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि आवासीय व्यवस्था अस्पताल परिसर में नहीं होने से उन्हें अस्पताल से दूर आवास का प्रबंध करना पड़ रहा है। इसका असर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी पड़ता है, खासकर इमरजेंसी के दौरान आने में अतिरिक्त समय लग जाता है। जिला अस्पताल परिसर में डॉक्टर और अन्य मेडिकल स्टाफ की निर्माणाधीन कालोनी का काम करीब 9 साल में भी पूरा नहीं हो सका। धन नहीं मिलने से दिसंबर 2011 से काम बंद हुआ, जो आज तक फिर से शुरू नहीं हो सका है।


वहीं आवास के लिए समय पर धन नहीं मिलने से न केवल काम में देरी हो रही है, बल्कि लागत में भी बढ़ोत्तरी हो रही है। निर्माण की लागत 3.52 करोड़ रुपये बढ़ गई है। कार्यदायी संस्था उप्र राजकीय निर्माण निगम का कहना है कि 4.01 करोड़ रुपये से बनने वाली आवासीय कलोनी की लागत बढ़कर 7.54 करोड़ हो गई है। अगस्त 2008 से राज्य सेक्टर से शुरू हुए आवासीय कालौनी के निर्माण कार्य में  1.80 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। इस राशि के खर्च होने के बाद पिछले साल जिला प्लान से 50 लाख रुपये मिले थे। इसके बाद एक रुपया नहीं मिला है। बजट के अभाव में निर्माण कार्य बंद पड़ा हुआ है। 
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डॉक्टरों के चार आवास तैयार, दो को आवंटित हुए
चंपावत। जिला अस्पताल परिसर की आवासीय व्यवस्था तो अभी बे-पटरी है, लेकिन इस बीच डॉक्टरों के चार आवास बनकर तैयार हो गए हैं। इनमें से दो आवास डॉक्टरों को आवंटित किए गए हैं। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी ने बताया कि पिछले साल अगस्त में जिला प्लान से मिले 50 लाख रुपये से एक आवासीय ब्लाक के लटके काम को पूरा करा लिया गया है। इससे डॉक्टरों के चार आवास तैयार हो गए हैं। इन्हें रेडियोलॉजिस्ट डॉ.एचसी त्रिपाठी व गाइनोलॉजिस्ट डॉ.संगीता त्रिपाठी और वरिष्ठ चिकित्साधिकारी (एसएमओ) डॉ.इंद्रजीत पांडेय को पिछले सप्ताह आवंटित कर दिया गया है। जबकि दो आवासों को नए आने वाले दो डॉक्टरों को आवंटित किया जाएगा। पिछले महीने जिला अस्पताल के औचक मुआयने में डीएम डॉ.अहमद इकबाल ने इन आवासों में बिजली, पानी संयोजन सहित अन्य तमाम व्यवस्थाओं को पूरा करने की हिदायत दी थी। डॉक्टरों के अस्पताल परिसर के आवास में रहने से स्वास्थ्य सेवा में सुधार होगा।

क्रासर
जिला अस्पताल परिसर में डॉक्टरों और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ के आवासों के लिए बजट नहीं मिल रहा है। धन नहीं आने से काम लटका है। बजट की लगातार मांग की जा रही है। आवास अधूरे होने से स्टाफ को दूरदराज से आना पड़ता है। जिस का काम पर असर पड़ता है।
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डॉ.आरके जोशी
मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।
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