फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सड़क दुर्घटना में थाने के कांस्टेबल की मौत

Mon, 29 May 2017 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बनबसा
विज्ञापन
दिवंगत पुलिसकर्मी को हथियार उल्टे कर अंतिम विदाई देते पुलिस के जवान - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विज्ञापन
रविवार रात थाने के कांस्टेबल शंकर सिंह की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। घटना से उसके परिजनों समेत पुलिस महकमे में शोक की लहर है। सोमवार को पुलिस सम्मान के साथ शारदा तट पर कांस्टेबल का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

रविवार रात पुलिस को किसी ने सूचना दी कि कोई व्यक्ति स्ट्रांग गेट के पास सड़क किनारे गिरा है। सूचना पर जब पुलिस वहां पहुंची तो पता चला कि वो थाने का कांस्टेबिल शंकर सिंह (47) है। शंकर सिंह गढ़ीगोठ से ड्यूटी कर अपनी बाइक से थाने लौट रहा था। बताया गया कि रास्ते में किसी व्यक्ति से उसकी बाइक की टक्कर हो गई और वह सड़क पर गिरा पड़ा था, हेलमेट दूर छिटका था। पुलिस कर्मी उसे खटीमा अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। शंकर सिंह पूर्व सैनिक भी था। बिना हेलमेट बाइक नहीं चलाता था। थानाध्यक्ष राजेश पांडेय ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव का पुुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। चिता को मुखाग्नि शंकर सिंह के पुत्र अभिषेक और प्रशांत ने दी। अंतिम संस्कार में सीओ प्रयाग सिंह कफलिया, आरआई आरएम पांडेय, टनकपुर कोतवाल अरुण वर्मा, थानाध्यक्ष राजेश पांडेय, अभिसूचना के इंस्पेक्टर एनएन जोशी, एलआईयू प्रभारी भाष्कर बडोला, एसओटीएफ प्रभारी मो. आशिफ, पूर्व सैनिक कल्याण समिति अध्यक्ष कै. भानी चंद, खटीमा के अध्यक्ष केएस खनका, कै. जीवन सिंह, पुष्कर कापड़ी आदि मौजूद थे। वहीं, सीओ और आरआई ने मृतक के घर पहुंचकर परिजनों का सांत्वना दी। उन्होंने पुलिस फंड से परिजनों को एक लाख की नकद राशि भी सौंपी।
विज्ञापन



सेना मेडल से सम्मानित था कांस्टेबल शंकर सिंह
बनबसा (चंपावत)। पुलिस कांस्टेबल शंकर सिंह पूर्व सैनिक था, जिसे अदम्य साहस के लिए सेना मेडल से नवाजा गया था। सेना मेडल प्राप्त कांस्टेबल शंकर सिंह वर्ष 2003 में अवकाश लेने के बाद 2006 में उत्तराखंड पुलिस में भर्ती हुआ था। इन दिनो वह बनबसा थाने में तैनात था।
विज्ञापन

मूल रूप से गढ़ीगोठ बनबसा निवासी शंकर सिंह ने शारदा इंटर कॉलेज से हाइस्कूल उत्तीर्ण किया था। 17 मई 1988 को वह सेना में भर्ती हुआ। सेना की 17 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनाती के बाद वर्ष 1996 में उसे स्पेशल फोर्स में भेजा गया। जम्मू-कश्मीर में तैनाती के दौरान 18 जुलाई 1998 में कुपवाड़ा के कालारुस गांव में दस आतंकियों को मार गिराने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसकी आंख का ऑपरेशन कर छर्रे निकाले गए थे, लेकिन उसके सिर पर मोर्टार के छर्रे अंत तक मौजूद रहे। उक्त ऑपरेशन की सफलता पर राष्ट्रपति ने शंकर सिंह को 15 अगस्त 1998 में सेना मेडल से सम्मानित किया था। जिसे तत्कालीन सेनाध्यक्ष एस पद्मनाथन ने भेंट किया था।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें