चंपावत। राजकीय विद्यालयों में अतिरिक्त और जीर्णशीर्ण कक्ष पुराने उपकरणों से भरे जा रहे हैं। ई-कचरा निस्तारण को लेकर विद्यालयाें में कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे हैं। इसके चलते वेस्ट कचरे से निकलने वाली हानिकारक परिणामों को लेकर तो काफी जन जागरूकता कार्यक्रम किए गए पर विद्यालयों में जमा ई वेस्ट को लेकर कोई ठोस उपाय नहीं निकाला गया है।
वर्तमान समय में विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रानिक डिवाइस का ई कचरा पर्यावरण के लिए बहुत बड़ी समस्या बनकर सामने आ रहा है। इससे निकलने वाली हानिकारक किरणों से बचाव के लिए तमाम प्रकार की सावधानियां बरती जा रही हैं। विगत वर्ष पांच जून से जिले के सभी विद्यालयों में इसको लेकर जन जागरूकता अभियान भी चलाए गए हैं।
इसके तहत 20 विद्यालयों की ओर से इस संबंध में संपादित क्रियान्वयन का रिकार्ड भी पेश किया गया है। इस संबंध में बताया गया कि इलेक्ट्रानिक सामग्री से निकले कचरे को ई वेस्ट कहा जाता है। विद्यालयों, सार्वजनिक स्थलों और घरों में लगे बिजली उपकरणों, रेडिया, मोबाइल, कंम्प्यूटर सहित सभी विद्युत उपकरणों से चलित मशीनों के खराब होने के बाद बहुत समय तक एक जगह पर पड़े रहते हैं या फिर कूड़ेदानों में फेंक दिए जाते हैं।
कोट
ई कचरा खराब हानिकारक रसायनों का उत्सर्जन करते हैं। इसके फलस्वरूप पर्यावरण दूषित होता है। प्राथमिक से लेकर माध्यमिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को ई-कचरा से निपटने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इस संबंध में सभी संबंधित विद्यालयों को ई कचरा का रिकार्ड शिक्षा विभाग को दिए जाने को लिए निर्देशित किया गया है। - मेहरबान सिंंह बिष्ट, सीइओ, चंपावत।
खोली में शांतनु का स्वागत करते कांग्रेस कार्यकर्ता। -संवाद