पंचेश्वर बांध में समा जाएगी इस क्षेत्र की वन संपदा।
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पंचेश्वर बांध का निर्माण होने पर महाकाली और सरयू घाटी में पैदा होने वाले बहुमूल्य पौधे नष्ट हो जाएंगे। प्रभावित क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरकार ने इस वन्य संपदा का अब तक कोई आकलन नहीं किया है। यह सभी पौधे लोगों ने संरक्षित किए हैं। इन पौधों के नष्ट होने पर मुआवजा देने की मांग की गई है।
सोमवार को पंचेश्वर बांध संघर्ष समिति की बैठक में कहा गया है कि नदी घाटी के इन गर्म इलाकों में च्यूरा, हरड़, दालचीनी, आंवला, गिलोय, हिसालू, किलमोड़ा जैसी बहुमूल्य वनस्पति पाई जाती है। बांध के डूब क्षेत्र में यह सारी वनस्पति आ रही है। समिति के संयोजक बसंत बल्लभ भट्ट ने कहा कि इन वनस्पतियों के बारे में न तो बांध का सर्वे करने वालों को जानकारी है और न सरकार ने ही इसका संज्ञान लिया है। इन वनस्पतियों का उपयोग लोग लंबे समय से करते आए हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री और प्रदेश के वित्त मंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि वन संपदा का अलग से सर्वे किया जाए और उनके महत्व के हिसाब से स्थानीय लोगों को मुआवजा दिया जाए। संघर्ष समिति के अध्यक्ष भगवान सिंह भाट ने बांध से प्रभावित होने वालों को प्रचलित मूल्य से आठ गुना मुआवजा दिए जाने, भूमि और वन भूमि की पूरी भरपाई किए जाने, तीनों जिलों के बांध प्रभावितों को एक ही स्थान पर बसाने और वहां पर सारी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। संघर्ष समिति के प्रवक्ता कै. गणेश सिंह ने कहा कि प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। उपाध्यक्ष कैलाश पालीवाल और उप सचिव हयात सिंह महर ने डूब क्षेत्र के सभी लोगों को वन भूमि का अधिकार देने और प्रभावित हिस्से का मुआवजा देने की मांग की।