चंपावत। नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के तामली सहित कई इलाकों में मवेशियों के बीमार होने और कई पशुओं के मरने के बाद पशुपालन विभाग बेपरवाह है। ग्रामीणों की शिकायत के तीन दिन बाद भी विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची।
ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में पशुओं में सूजन, दाने होने और कमजोरी की शिकायत है। करीब दो महीने में 13 मवेशियों की मौत हो चुकी है। मरने वाले जानवरों में गाय, बछड़ा, भैंस, खच्चर और बकरी शामिल हैं। मौत के अलावा 21 से ज्यादा पशु बीमार हैं। शनिवार को जानकारी देने के बावजूद अब तक नहीं पशुपालन विभाग की टीम नहीं आई। टीकाकरण के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया जा सका है। ग्रामीणों ने कहा कि इस लापरवाही की शिकायत मुख्यमंत्री से करेंगे।
तल्लादेश के दोनों पशु केंद्र में भी ताले
पशु प्रसार अधिकारियों की कमी आड़े आ रही
संवाद न्यूज एजेंसी
चंपावत। तल्लादेश में पशुओं के इलाज का प्रबंध नहीं है। तल्लादेश के तामली और मंच में पशु सेवा केंद्र है लेकिन दोनों केंद्रों में ताले लटके हैं। ग्रामीणों ने कहा कि इसका सबसे ज्यादा नुकसान दुधारू पशुओं की तबियत बिगड़ने पर होता है। इलाज के लिए मवेशियों को तामली से 52 किमी दूर लाना पड़ता है। दिनेश जोशी, पुष्कर सिंह, भुवन जोशी, प्रकाश राम, शंकर राम, किशन राम, रमेश राम, बिशन दत्त, तान सिंह, रघुवर सिंह, गणेश सिंह, विमल जोशी, पुष्कर राम आदि ने पशु सेवा केंद्रों का जल्द संचालन शुरू कराने की मांग की है। चंपावत जिले के 23 पशु सेवा केंद्रों में से 11 (मंच, तामली, देवीधुरा, जोश्यूड़ा, चौड़ामेहता, भिंगराड़ा, बसेड़ी, पुलहिंडोला, रौसाल, खतेड़ा और सूखीढांग) में ताले लटक रहे हैं।
चंपावत के पशु अस्पताल और पशु एंबुलेंस के डॉक्टर के छुट्टी में होने से टीम तामली नहीं भेजी जा सकी। डॉक्टर के आने पर अब बुधवार को टीम भेजी जाएगी। तामली और आसपास के विभिन्न गांवों के बीमार मवेशियों का टीकाकरण और इलाज किया जाएगा। पशुधन प्रसार अधिकारी नहीं होने से तल्लादेश सहित करीब 50 प्रतिशत पशु सेवा केंद्र बंद हैं।
डॉ. पीएस भंडारी, सीवीओ, चंपावत।