चंपावत। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद चंपावत जिले में परिवहन सुविधाओं में रोडवेज बसों की भागीदारी कम होती जा रही है। ग्रामीण मार्गों पर तीन बसें बंद होने के अलावा कई बसें अनियमित रूप से संचालित हो रही हैं। इससे आम यात्रियों को असुविधा हो रही है। बुजुर्ग मुसाफिरों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।
यूपी के दौर में नेपाल सीमा से लगे तीन मार्ग टनकपुर-तामली, टनकपुर-रौसाल और टनकपुर-दिगालीचौड़ बस सेवा पूरी तरह बंद हो चुकी है। हल्द्वानी से रीठा साहिब जाने वाली बस भी नियमित रूप से नहीं चल रही है। इसके अलावा चंपावत से पाटी बस सेवा भी नहीं है। आम मुसाफिरों को जीप-टैक्सी में यात्रा करनी पड़ रही है। 65 वर्ष से अधिक के नागरिक सरकारी योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इन वरिष्ठ नागरिकों को 2015 से उत्तराखंड राज्य के भीतर रोडवेज बस में निशुल्क आवाजाही की सुविधा है लेकिन बसों का संचालन नहीं होने से वे इस सुविधा से वंचित हैं। अन्य नागरिक जीप-टैक्सी में अक्सर ओवरलोड और अधिक किराये की मार झेल रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता भुवन चंद्र, राहुल सिंह, माधव सिंह सहित कई ग्रामीणों ने रोडवेज बस सेवा के संचालन की मांग की है। उधर रोडवेज के अधिकारियों का कहना है कि बसों की कमी की वजह से फिलहाल इन रूटों पर बस सेवा का प्रस्ताव नहीं है।