तराई पूर्वी वन प्रभाग के खटीमा रेंज के जंगल में लकड़ी तस्करों का राज बना हुआ है। तस्कर हर दिन जंगल में खड़े सागौन के पांच से छह हरे पेड़ों को धराशायी कर रहे हैं, लेकिन जंगल के रक्षकों को इससे कोई सरोकार नहीं है। तस्करों का यही राज बना रहा तो आने वाले कुछ वर्षों में जंगल का सफाया हो जाएगा।
लकड़ी-पत्थर के कारोबार के लिए मशहूर इस क्षेत्र में माफियाओं की सक्रियता नई बात नहीं है। वन संपदाओं की तस्करी का धंधा लंबे समय से चल रहा है। इन दिनों खटीमा रेंज के छिनी कंपार्टमेंट का सागौन का जंगल लकड़ी तस्करों के निशाने पर है। सागौन के हरे पेड़ों को बेखौफ धराशायी कर तस्कर लकड़ी औने-पौने दामों में बेचकर वारे-न्यारे कर रहे हैं। सागौन की अवैध लकड़ी के दाम कम होने से मांग अधिक है। स्थानीय स्तर पर खपत के साथ ही तस्कर बनबसा और खटीमा तक लकड़ी की सप्लाई कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि जंगल के रक्षकों को इसकी जानकारी नहीं है।