छठ पर्व पर लोहाघाट और टनकपुर में पूर्वांचल मूल के लोगों ने डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर घर में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। जहां महिलाओं ने सूर्यास्त के बाद व्रत रखकर सूर्य की पूजा-अर्चना की। वहीं, नगर के शिवालय मंदिर के पास बहने वाली लोहावती नदी के तट पर पहुंचे सैकड़ों पूर्वांचल मूल के लोगों ने सूर्य को अर्घ देकर व्रत की शुरुआत की।
लोहाघाट की शारदा देवी एवं गीता देवी ने बताया कि यह व्रत उनके द्वारा प्रति वर्ष किया जाता है। छठ पर्व पर महिलाओं द्वारा सूर्यास्त के बाद अन्न जल ग्रहण नहीं किया जाता है। रात भर भजन-कीर्तन और विभिन्न अनुष्ठान कराए जाते हैं। सुनीता देवी, सीता देवी, मीरा देवी ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देकर लोहावती नदी के तट पर पारंपरिक मांगलिक गीत गाए। महिलाएं सोमवार को सूर्योदय के साथ ही व्रत खोलेंगी। वहीं, टनकपुर के शारदा घाट पर दोपहर बाद से ही खासी संख्या में लोग जुटने लगे।
महिलाओं ने पूजा-अर्चना के साथ डूबते सूरज को अर्घ्य दिया। क्षेत्र में पूर्वांचल समाज के लोगों की संख्या भी अच्छी-खासी है। इनमें पिछले कई दिनों से छठ पूजा को लेकर उत्साह है। बाजार में पूजा के लिए फल एवं पूजन सामग्री की खरीदारी जमकर हुई। इस बीच सुख समृद्धि की कामना के लिए महिलाओं ने व्रत रखा। रविवार सायं पूजा-अर्चना से शारदा घाट क्षेत्र भक्ति में डूब गया। इस दौरान पूजा-अर्चना एवं डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया गया। व्रती सोमवार को सुबह सूर्य की पूजा-अर्चना, अर्घ्य देने के बाद ही जल ग्रहण करेंगे। इस दौरान घाट पर सभासद देवेंद्र सिंह, हरिकेश गिरी, अनिल सिन्हा, चंद्रिका प्रसाद, देव कुमार पांडे, भरत बाबू, शंकर लाल, पप्पू ठाकुर समेत पूर्वांचल सेवा समिति के कई लोग, महिलाएं और बड़े मौजूद थे।