चंपावत। श्रावणी उपाकर्म पर बृहस्पतिवार को सभी स्थानों पर वेदोक्ता ऋषय तृपंताम, वंशोक्ता ऋषय तृपंताम के मंत्र गूंजते रहे। जिला मुख्यालय में मुख्य आयोजन लक्ष्मीनारायण मंदिर में हुआ। वहां पर पंडितों ने जनेऊ और रक्षा धागा की प्रतिष्ठा की। उसके बाद नया जनेऊ धारण किया गया।
रक्षा धागा की प्रतिष्ठा करने के बाद पंडित अपने यजमानों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधते हैं। यजमान को रक्षासूत्र बांधते समय-येन बद्धो बली राजा, दानवेंद्रो महाबल, तेन त्वांहम प्रतिबद्धामि रक्षं माचल माचल, मंत्र कहा जाता है। लक्ष्मीनारायण मंदिर में पंडित आनंदबल्लभ जोशी ने श्रावणी उपाकर्म के अनुष्ठान पूरे कराए।
चंपावत में श्रावणी उपाकर्म पर विधि-विधान के साथ छतार के पास ऋषि तर्पण हुआ। सात ऋषियों के पूजन के बाद लोगों ने नई जनेऊ धारण की। गणेश पूजन, मातृका पूजन, नवग्रह पूजन, पुण्यवाचन किया गया। सप्त ऋषियों कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि, वशिष्ठ, अरुंधति का तर्पण किया।
पुरोहित सुरेश चंद्र पुनेठा ने बताया कि यज्ञोपवीत के बाद ही जनेऊ धारण की जा सकती है। रक्षाबंधन पर्व पर ऋषि तर्पण करने के बाद नई जनेऊ धारण करने की परंपरा है। बाद में पुरोहित ने यजमान गोविंद बल्लभ रस्यारा, हीराबल्लभ पांडेय, मोहन चंद्र रस्यारा, लोकमणि पंत, उमापति जोशी आदि को रक्षा सूत्र बांधा।