चंपावत। जिला मुख्यालय में पानी का संकट दिन-पर-दिन उफान पर है। टैंकरों के सहारे पेयजल सप्लाई की जा रही है। मगर इसके लिए भी लोगों को लंबा सब्र करना पड़ रहा है। पेयजल संकट ने लोगों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित किया है। चंपावत में पानी के संकट को कम करने के लिए रोस्टर बनाया गया। टुल्लू पंप के उपयोग को रोकने के लिए पेयजल आपूर्ति के वक्त पावर कट करने की कोशिश चल रही है, मगर ये कवायद भी संकट को कम नहीं कर पा रही है।
लोगों को टैंकर और पिकअप का सहारा लेना पड़ रहा है पर इनके लिए लंबी लाइन लगाकर इंतजार करना लोगों की मजबूरी बन रहा है। जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा का कहना है कि पेयजल स्रोत में गिरावट लगातार बढ़ रही है। स्रोतों से अब तीन लाख लीटर पानी भी नहीं मिल पा रहा है, जबकि जरूरत 16 लाख से ज्यादा की है। पानी की भरपाई के लिए लगातार टैंकर और पिकअप का सहारा लिया जा रहा है। इन वाहनों के फेरों की संख्या भी बढ़ाकर 13 तक कर दी गई है।
चंपावत। पेयजल संकट से निपटने को शासन ने बड़ा फैसला लिया है। फौरी राहत के तौर पर मांडेक्स हैंडपंप लगाए जाएंगे। राज्यपाल कार्यालय से इस प्रस्ताव को अनुमोदन मिल चुका है। डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने बताया कि शासन ने चंपावत, लोहाघाट के संकटग्रस्त इलाकों में मांडेक्स हैंडपंप लगाने का निर्णय लिया है। इस अनुमोदन के बाद जल संस्थान को तत्काल सर्वे कर हैंडपंप लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
लोगों की परेशानी को दूर करने के लिए जितने हैंडपंप जरूरी होंगे, लगाए जाएंगे। जल संस्थान चंपावत डिवीजन के अधिशासी अभियंता पीसी करगेती का कहना है कि पानी की भूगर्भीय उपलब्धता का सर्वे कर हैंडपंप लगाए जाएंगे। दूरगामी कदम के मद्देनजर चंपावत पुनर्गठन पेयजल योजना सहित अन्य पेयजल स्कीमों के काम में तेजी लाई जाएगी।