चंपावत। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित धार्मिक मान्यता से जुड़े पंचेश्वर की सरयू नदी में गंदगी बढ़ती जा रही है। यहां अंतिम संस्कार के बाद अधजले शव पड़े रहते हैं। पौराणिक महत्व, धार्मिक मान्यता के चलते नदी की गंदगी से स्थानीय लोग बेहद चिंतित हैं। नदी की शुद्धता के लिए कानूनी कार्रवाई समेत सभी प्रकार के उपाय करने की मांग की गई है।
पंचेश्वर की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। रॉफ्टिंग से लेकर एंगलिंग तक की प्रतियोगिताएं यहां होती हैं लेकिन नदी के किनारे अधजले शवों से प्रदूषण बढ़ रहा है। वर्षों से नदी की सफाई की मुहिम चलाते रहे जीआईसी पुलहिंडोला के सेवानिवृत्त शिक्षक माधो सिंह अधिकारी का कहना है कि पहले लोग पानी की गहराई पर पत्थर लगाकर लकड़ियों से चिता बनाई जाती थी।
शवदाह के बाद लकड़ी, कपड़ा, कोयला, राख, हड्डी आदि सामग्री नदी में बहा देते थे, जिससे नदी साफ रहती थी, लेकिन अब यहां आने वाले लोगों में से काफी संख्या ऐसी है, जो अधूरे जले शवों को छोड़ जाते हैं, जिससे चिंतित उम्मेद सिंह अधिकारी के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने इस माह चार बार सफाई अभियान भी चलाया। रिटायर्ड शिक्षक माधो ने वन और पर्यावरण विभाग को पत्र भेजा है, जिसमें गंदगी करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी के नोटिस बोर्ड नदी के किनारे लगाने की मांगी की गई है।