फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Champawat News: बीसूका क्रियान्वयन में तीसरे से आठवें स्थान पर खिसका चंपावत

Mon, 17 Jun 2024 12:10 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
विज्ञापन
विज्ञापन
चंपावत। बीस सूत्रीय कार्यक्रम (बीसूका) में चंपावत जिले की रैंकिंग में गिरावट आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के प्रतिनिधित्व वाला चंपावत जिला प्रदेश भर में बीसूका की रैंकिंग में तीसरे स्थान से खिसक कर आठवें स्थान पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और मातृ-पितृ वंदन योजना में मिली डी श्रेणी के कारण चंपावत जिला पांच पायदान नीचे खिसक गया है। प्रदेश में बीसूका क्रियान्वयन में ऊधमसिंह नगर जिला पहले और अल्मोड़ा जिला सबसे आखिरी 13 वें पायदान पर पहुंचा। बीसूका में ऊधमसिंह नगर 95.96 प्रतिशत अंकों के साथ सबसे आगे रहा। जबकि देहरादून 95.10 प्रतिशत अंकों के साथ दूसरे और बागेश्वर 93.94 प्रतिशत नंबरों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।
विज्ञापन

मुख्यमंत्री धामी के निर्वाचन क्षेत्र वाले चंपावत जिले को उत्तराखंड का पहला मॉडल जिला बनाने की कवायद चल रही है। इस दिशा में आधारभूत सुविधाओं से लेकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इजाफा और स्वरोजगार परक योजनाओं को तेजी से लागू किए जाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन गरीबी उन्मूलन, उत्पादकता बढ़ाने, आय की असमानता कम करने, सामाजिक और आर्थिक विषमताओं को दूर करने के लिए काम करने वाले बीस सूत्रीय कार्यक्रम में चंपावत जिले ने मायूस किया है। अर्थ सांख्यिकी विभाग की ओर से जारी रैंकिंग में चंपावत को 96 में से 85 अंक यानी 88.54 प्रतिशत अंक मिले हैं। इन 26 मदों में ए, तीन मदों में बी और दो मदों में डी श्रेणी मिली है। संवाद

प्रदेश के सभी जिलों में बीसूका की वर्तमान स्थिति
जिला पूर्णांक प्राप्तांक प्रदेश में स्थान
ऊधमसिंह नगर 99 95 1
देहरादून 102 97 2
बागेश्वर 99 93 3
टिहरी 96 90 4
रुद्रप्रयाग 96 90 5
नैनीताल 102 92 6
उत्तरकाशी 99 89 7
चंपावत 96 85 8
पिथौरागढ़ 99 87 9
हरिद्धार 99 86 10
पौड़ी 99 85 11
चमोली 99 85 12
अल्मोड़ा 96 82 13
कोट
वित्तीय वर्ष 2023-24 में चंपावत जिला बीस सूत्रीय कार्यक्रमों की उपलब्धियों पर आठवें स्थान पर रहा है। गत वर्ष चंपावत प्रदेश भर में तीसरे स्थान पर रहा था। विभिन्न योजनाओं में अधिक लक्ष्य भी रैंकिंग में पिछड़ने की वजह रहा है। - दीप्तिकीर्ति तिवारी, जिला अर्थ संख्याधिकारी, चंपावत।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें