नकदी जुटाने की भारतीय स्टेट बैंक की तमाम कोशिश नाकाम हो रही है। शीघ्र ही धनराशि नहीं मिलने पर जिला मुख्यालय में नकदी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। वैसे बैंक के पास सवा करोड़ रुपये ही बचे हैं। जबकि हर दिन जमा और निकासी होने वाली रकम में भी भारी अंतर है। बैंक में प्रतिदिन ग्राहकों की ओर से 25 लाख रुपये जमा हो रहे हैं। जबकि हर दिन 60 लाख रुपये निकासी हो रही है। जमा निकासी में बड़ा अंतर होने से बैंक की दिक्कतों में इजाफा हो रहा है।
यहां की मुख्य कैश चेस्ट एसबीआई बुरे दौर से गुजर रही है। बैंक के तमाम प्रयासों के बाद भी रकम नहीं उपलब्ध हो पा रही है। संकट से निपटने के लिए बैंक ने रिजर्व बैंक कानपुर से दो सौ करोड़ रुपये की मांग की है। जबकि बैंक के पास वर्तमान में बेहद सीमित धनराशि ही बची है। जो दो तीन दिन के लिए ही पर्याप्त है। नकदी संकट को देखते हुए एसबीआई अन्य बैंकों को पांच लाख रुपये से अधिक नहीं दे रहा है। बैंक सूत्रों का कहना है कि यदि शीघ्र ही धनराशि का इंतजाम नहीं हो सका तो ग्राहकों को दी जाने वाली धनराशि को भी सीमित करना पड़ सकता है।
एसबीआई के उप प्रबंधक निर्मल भट्ट का कहना है कि बैंक में प्रतिदिन 25 लाख रुपये जमा हो पा रहे हैं। जबकि इसके ठीक विपरीत बैंक से हर दिन तकरीबन 60 लाख रुपये की निकासी हो रही है। जमा और निकासी में भारी अंतर होने से भी बैंक में नकदी का संकट बना हुआ है। उनका कहना है कि बैंक में वर्तमान में सवा करोड़ के अलावा 80 लाख रुपये के सिक्के उपलब्ध हैं। लेकिन ग्राहक इन सिक्कों को लेना ग्राहक पसंद नहीं कर रहे हैं।
सिर्फ एसबीआई के एटीएम में है धनराशि
चंपावत। रविवार को भी जिला मुख्यालय के अधिकतर एटीएम बंद रहे। लोगों को धनराशि निकालने के लिए तमाम एटीएम के चक्कर लगाने पड़े। जीआईसी चौक, गोरलचौड़ रोड के एसबीआई, बॉब, कैनरा, यूनियन बैंक, यूको, आईडीबीआई समेत तमाम एटीएम बंद रहे। अलबत्ता एसबीआई के मुख्य एटीएम से जरूर रकम निकली, लेकिन यहां भी सिर्फ दो हजार रुपये के नोट ही उपलब्ध थे।
कोट
चंपावत में धीरे धीरे नकदी का संकट गहरा रहा है। जिले को नकदी उपलब्ध कराने के लिए रिजर्व बैंक देहरादून को कई बार पत्र लिखा गया है। लेकिन करेंसी उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
आनंद सिंह रावत, लीड बैंक प्रबंधक, चंपावत।