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भूस्खलन और पानी के तेज बहाव से बही कार, खाई में लुढ़की, तीन जख्मी

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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनलेख में सड़क पर खड़े वाहन। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। मूसलाधार बारिश के बीच हुए भूस्खलन से तेज गति से आए पानी और मलबे की चपेट में आकर टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनलेख के पास खड़ी एक कार और एक कैंटर 30 फीट गहरी खाई में गिर गए। घटना में कार में सवार पांच लोग घायल हो गए। सभी घायलों को जिला अस्पताल लाया गया। सभी की हालत खतरे से बाहर है। जबकि खाई में गिरे कैंटर में कोई भी व्यक्ति सवार नहीं था। इस घटना से मौके पर अफरा तफरी मच गई। इस जगह पर पहली बार भूस्खलन हुआ है। आगे सड़क बंद होने के कारण वाहनों को बनलेख के पास रोका गया था।
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टनकपुर पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चंपावत से नौ किमी दूर बनलेख के पास मंगलवार को अपराह्न डेढ़ बजे अचानक हुए भूस्खलन से तेज बहाव से पानी और मलबे की चपेट में आकर सड़क पर खड़ी एक कार और एक टैंकर 30 फीट गहरी खाई में गिर गए। खाई में गिरी कार में पांच लोग सवार थे। यह कार पिथौरागढ़ से गुरुग्राम जा रही रही थी। दुर्घटना में पिथौरागढ़ जिले के गुरना निवासी खीम सिंह (41) पुत्र देव सिंह, प्रिया लाल (37) पत्नी खीम सिंह और उनके तीन बच्चे तनीसा (13), करन (11) और नायरा (2) घायल हो गए। जानकारी लगने पर एसडीएम अनिल गर्ब्याल और कोतवाल शांति कुमार के नेतृत्व में पुलिस और बचाव दल ने तुरंत मौके पर पहुंच स्थानीय लोगों के सहयोग से कार में सवार घायलों को निकाला। फौरन सभी घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. एचएस ऐरी और डॉ. एसएस अधिकारी ने घायलों का इलाज किया। डॉ. ऐरी ने बताया कि खीम सिंह को आंखों में और प्रिया लाल के शरीर के ऊपरी हिस्सों में चोट लगी है। अलबत्ता सभी लोग खतरे से बाहर है। एनएच बंद होने के कारण वाहनों को बनलेख में रोका गया था।
बादल नहीं फटा : डीडीएमओ
चंपावत। मलबे के साथ एकाएक तेजी से आए पानी से बादल फटने की चर्चाओं को आपदा प्रबंधन विभाग ने खारिज किया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी (डीडीएमओ) मनोज पांडेय ने कहा कि बनलेख में बादल नहीं फटा। यहां की पहाड़ी से भूस्खलन में एक साथ तेज वेग से सड़क पर पानी आया, जिसकी चपेट में आने से दो वाहन बहे। पांडेय ने बताया कि बादल फटना बारिश का चरम रूप है। आम तौर पर बादल फटने से कुछ मिनटों तक मूसलाधार बारिश होती है। बादल फटने से एक घंटे में सौ मिलीमीटर बारिश हो सकती है। इस दौरान इतना पानी बरसता है कि क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। आपदा प्रबंधन अधिकारी कि अनुसार चंपावत जिले में बादल फटने की आशंका वाला कोई क्षेत्र नहीं है।
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सात मिनट देर होने से बची पुष्पा की जिंदगी
चंपावत। भूस्खलन से बनलेख के पंडित पूर्णानंद जोशी का मकान बाल-बाल बच गया। अलबत्ता दीवार गिरने से मकान को खतरा बढ़ गया। इस मकान में उनके दो बेटों पीआरडी कर्मी ईश्वरी दत्त जोशी और प्रकाश जोशी के परिवार के कुल 12 लोग रहते थे। भूस्खलन के समय घर में दस लोग थे। ईश्वरी दत्त ड्यूटी पर और प्रकाश जोशी काम से बाहर गए हुए थे। इस बीच पीआरडी कर्मी की पत्नी पुष्पा जोशी उसी रास्ते से मवेशियों को चारा देने के लिए गोशाला जा रही थी। तभी उनके ससुर पूर्णानंद जोशी ने बहू पुष्पा को किसी काम से आवाज दी। इस काम में करीब सात मिनट लग गए। इसी बीच भूस्खलन का ये वाकया हो गया। देरी के चलते पुष्पा की जान बच गई।

भूस्खलन और तेज पानी के बहाव से बनलेख में खाई में गिरी कार और कैंटर।- फोटो : CHAMPAWAT

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