लोहाघाट में मुख्य राजमार्ग पर हुए अतिक्रमण हटाने के हाईकोर्ट आदेश से भवन स्वामियों की नींद उड़ गई है। जिला प्रशासन ने 4 अगस्त 2011 तक लोहाघाट से राईकोट महर तक तीन किमी केे दायरे में 231 अतिक्रमण चिह्नित कर जिला प्रशासन को भेजे थे। राजस्व उपनिरीक्षक जगदीश राम का कहना है कि इसके बाद और अतिक्रमण हुए हैं, जिन्हें अभी तक चिह्नित नहीं किया गया है।
बताते चलें लोहाघाट में दशकों पुराने मकान बने हैं, जिनमें अब छोटी-छोटी दुकानें भी बन गई हैं। तब यहां कोई राजमार्ग घोषित नहीं किया गया था। लोगों का कहना है कि वह न्यायालय के आदेश का पूरा सम्मान करने के साथ मुख्यमंत्री से अनुरोध करेंगे कि लोहाघाट नगर के बाहर से ऐसा बाईपास बनाया जाए, जिससे रक्षा सेनाओं की जरूरत को देखते हुए मार्ग का चौड़ीकरण होने से उन्हें पूरी सुविधा मिल सके, साथ ही लोगों के विस्थापन की भी नौबत न आए।
जगदीश मेहता, किशोर मुरारी, पूरन सिंह, गंगा दत्त, बीडी राय, ब्रजेश माहरा आदि तमाम लोगों का कहना है कि टनकपुर से जौलजीवी तक मुख्य राजमार्ग में लोहाघाट की तरह ही लोगों ने मकान बनाए हुए हैं। कुछ लोग जहां सरकार से अन्यत्र विस्थापन की सुविधा की मांग कर रहे हैं, वहीं उनका कहना है कि सरकार ऐसा हल निकाले जिससे लोगों का आशियाना भी नहीं उजड़े और एनएच की जरूरत भी पूरी हो जाए। सभी की निगाहें मुख्यमंत्री हरीश रावत पर टिकी हुई हैं।