बीएसएनएल में ठेकेदारी में काम करने वाले श्रमिकों ने विभागीय अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इस संबंध में बीएसएनएल के महाप्रबंधक को ज्ञापन भेजा गया है। साथ ही समस्याओं का शीघ्र समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
उत्पीड़न के विरोध में विभिन्न स्थानों से आए कर्मचारियों ने बीएसएनएल कार्यालय में प्रदर्शन कर नाराजगी जताई है। बीएसएनएल कैजुअल एंड कांट्रेक्ट वकर्स फेडरेशन अल्मोड़ा के जिलाध्यक्ष ललित मोहन जोशी के नेतृत्व में आए कर्मचारियों ने उप मंडल अधिकारी मनीष पंत से वार्ता कर समस्या का समाधान करने की मांग की। कहा गया कि बेहद कम मानदेय के बावजूद भी किसी भी तरह की तकनीकी खराबी से मोबाइल टावर व कोई अन्य सेवा बाधित होने पर संबंधित कर्मचारी के वेतन में कटौती करा दी जाती है। जबकि श्रमिक मामूली कार्य व चौकीदारी के लिए रखे गए हैं। अकुशल श्रमिक का मानदेय माह में 26 दिन का ही दिया जाता है, जबकि सभी कर्मचारी माह में पूरे 30 दिन 24 घंटे सेवाएं दे रहे हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि सभी 22 विभागीय मोबाइल टावरों और दूरभाष केंद्रों का जिम्मा एक-एक कर्मचारी पर है। कर्मचारियों ने उनके साथ हो रही अभद्रता, उत्पीड़न पर रोक, मानदेय में की जाने वाली कटौती को बंद करने की मांग की है। भविष्य में कर्मचारियों का उत्पीड़न होने पर मोबाइल टावरों की सेवाओं को ठप कर उपमंडल अभियंता कार्यालय में धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। इस मौके पर बसंत बल्लभ जोशी, दुर्गादत्त भट्ट, राजेंद्र मेहता, भीम सिंह, दीप जोशी, अमर सिंह, पुष्कर जोशी आदि थे।
उत्पीड़न के आरोप निराधार : एसडीओ
उप खंड अधिकारी मनीष पंत का कहना है कि उत्पीड़न के आरोप निराधार है। जनवरी में किए गए औचक मुआयने में दो कर्मी अनुपस्थित मिले थे। अनुपस्थित अवधि का मानदेय काटे जाने से कर्मी उत्पीड़न का आरोप लगा रहे हैं।