टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर ठीक होकर आया निर्माणाधीन चल्थी पुल के उपकरण। संवाद
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चंपावत। टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल्थी का निर्माणाधीन पुल अगले पांच महीने में पूरा हो जाएगा। पिछले साल अक्तूबर में आई बाढ़ से हुए नुकसान से इस पुल का काम एक साल पीछे हो गया है। इस क्षतिग्रस्त निर्माणाधीन पुल के फाउंडेशन टावर और जैक के हिस्सों की मरम्मत कर दी गई है। ये हिस्से गाजियाबाद में मरम्मत के बाद चल्थी पहुंचा दिए गए हैं।
लधिया नदी पर 120 मीटर लंबा और 14.90 मीटर चौड़ा चल्थी पुल बनाया जाना है। यह टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर बारहमासी सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पहाड़ और मैदान को जोड़ने वाले इस पुल का निर्माण दिसंबर 2021 तक पूरा होना था लेकिन 80 प्रतिशत काम पूरा होने के बावजूद अक्तूबर 2021 की प्राकृतिक आपदा से निर्माण पूरा होने की तिथि भी आगे खिसक गई।
इस आपदा में पुल के पांच जैक और दो फाउंडेशन टावर नदी में बह गए थे। इन्हें खोजने के बाद लोहे के क्षतिग्रस्त जैक और टावर के हिस्सों को खोल कर मरम्मत के लिए गाजियाबाद भेजा गया। पिछले महीने पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से के आने से फिर से काम शुरू कर दिया गया है। अब इस काम को अगले साल मार्च तक पूरा करने की बात कही जा रही है।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माणाधीन चल्थी के पुल के क्षतिग्रस्त टावर और जैक मरम्मत के बाद आ चुका है। इसके बाद पुल का काम तेजी से किया जा रहा है। मार्च 2023 तक पुल के पूरा होने की उम्मीद है। - सुनील कुमार, ईई, राष्ट्रीय राजमार्ग खंड, लोहाघाट।
पुराने पुल से हो रही आवाजाही
चंपावत। नए पुल का काम अभी बाकी है। एनएच पर आवाजाही का उपयोग चल्थी के पुराने पुल से किया जा रहा है। वर्ष 1955 में बना 110 मीटर लंबा और दस फीट चौड़ा यह पुल अब भी काम आ रहा है। खंभों के सहारे के बगैर खड़े इस पुल का पूरा वजन उसके ऊपरी (धनुष आकार वाले ढांचे पर) हिस्से पर है लेकिन इस पुल की कम चौड़ाई के कारण एक बार में एक ही वाहन गुजर सकता है।