गर्मी शुरू होते ही पेयजल किल्लत शुरू हो गई है। शहर के लिए चार पेयजल होने के बावजूद भी लोगों को चौथे या पांचवें दिन पानी मिल पा रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कतें किराए में रहकर बोर्ड परीक्षा दे रहे छात्र-छात्राओं को हो रही है। उनका अधिकांश समय पानी ढोने में ही बर्बाद हो जा रहा है।
नगर की आबादी तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन पेयजल समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई। साल भर पेयजल समस्या बनी रहती है। सर्दी हो या बरसात हमेशा क्षेत्र में पेयजल समस्या से लोग त्रस्त रहते हैं। लोगों की पूरी निर्भरता हैंडपंपों, नर्सरी गधेरे, अक्कल धारे में टिकी हुई है। पेयजल के लिए सुबह से ही लोगों की लाइन लग जाती है। बजरंग बली वार्ड की तुलसी देवी, नीलम, लक्ष्मी देवी का कहना है कि नलों में चौथे या पांचवें दिन महज 20 से 30 मिनट पानी आ रहा है। जिससे काफी दिक्कतें हो रही हैं।
एक किमी दूर से लाना पड़ रहा है पानी
इंटरमीडिएट बोर्ड की परीक्षा दे रहे अभिषेक जोशी का कहना है कि पेयजल किल्लत के चलते उन्हें भारी परेशानियां झेलनी पड़ रही है। 500 मीटर से एक किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा है।
पानी लाने में बर्बाद हो रहे तीन घंटे
छात्र सौरभ गिरि का कहना है कि पेयजल समस्या से निपटने में दो से तीन घंटे बर्बाद हो जाते हैं। इस कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पानी के लिए शिवालय मंदिर के पास बने स्टेंड पोस्ट या अक्कलधारा जाना पड़ रहा है।
लाइन में लगने की मजबूरी
हिमांशु का कहना है कि पेयजल समस्या ने लोगों को बुरी तरह त्रस्त कर रखा है। पेयजल की व्यवस्था करने में ही काफी समय बर्बाद हो रहा है। पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। नर्सरी गधेरे अक्कल धारे में पानी के लिए लाइन लगानी पड़ रही है।
मिल रहा महज एक-चौथाई पानी
जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर पवन बिष्ट का कहना है कि पेयजल स्रोतों में कमी आ रही है। नगर में रोजाना औसतन 1620 किलोलीटर पानी की जरूरत है, जिसके सापेक्ष मात्र 450 किलोलीटर ही पानी मिल रहा है। बनस्वाड़ गधेरे से 15 केएल, चौड़ी लिफ्ट योजना से 400 केएल, ऋषेश्वर नलकूप से 25 केएल और फोर्ती योजना से 15 केएल पानी ही मिल पा रहा है।