चंपावत में फिलहाल नहीं मिलेगा खून
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चंपावत में खून की कमी अब भी जिंदगी पर भारी पड़ेगी। ब्लड स्टोरेज यूनिट को लेकर जून के शुरू से मचा शोर अब गायब है और ब्लड स्टोरेज यूनिट को लाइसेंस मिलने के बावजूद यूनिट के शुरू होने की संभावनाएं बेहद कम हैं। अब स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लैब तकनीशियन नहीं होने से संचालन में दिक्कत आ रही है।
ब्लड बैंक के राज्य नोडल अधिकारी डा.प्रदीप हटवाल ने बताया कि चंपावत के ब्लड स्टोरेज यूनिट को जुलाई में अनापत्ति देते हुए लाइसेंस दे दिया गया था। चंपावत ब्लड स्टोरेज यूनिट में खून की सप्लाई 75 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ के ब्लड बैंक से होनी थी। इसके लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) से मदर ब्लड बैंक पिथौरागढ़ द्वारा अनापत्ति प्रमाणपत्र भी दिया जा चुका है। पिथौरागढ़ ब्लड बैंक के प्रभारी डा.एनसी शर्मा का कहना है कि वे यहां से चंपावत को खून देने में सक्षम है।
जिला अस्पताल ने ब्लड स्टोरेज संचालन के लिए फ्रिज को ठीक भी करा लिया था पर लाइसेंस मिलने के एक माह से अधिक बीतने के बावजूद यह यूनिट शुरू नहीं हो सकी है, जबकि जूून के शुरू में एक महिला दीपा पांडेय की खून की कमी से हुई मौत के बाद 14 जून को इस ब्लड स्टोरेज यूनिट को शुरू कराने को देहरादून से स्वास्थ्य विभाग की टीम भी आई थी।
तीन के बजाय मात्र एक लैब तकनीशियन
जिला अस्पताल में पैथोलॉजिस्ट तो तैनात हैं, लेकिन लैब तकनीशियन (एलटी) तीन के सापेक्ष महज एक है, जबकि ब्लड स्टोरेज यूनिट में ही हर वक्त एक एलटी चाहिए। इस वजह से जिला अस्पताल में भी काम प्रभावित होता है।
ब्लड स्टोरेज यूनिट को लाइसेंस मिल गया है, मगर यूनिट के लिए जरूरी स्टाफ नहीं होने से इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है। लैब तकनीशियन के पद के लिए स्वास्थ्य महानिदेशालय और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन को पत्र भेजा गया है। इसके बाद ही ब्लड स्टोरेज यूनिट शुरू की जा सकेगी। -डा.आरके जोशी, मुख्य चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल, चंपावत।