पहली बार भाजपा के जिलाध्यक्ष की कुर्सी के लिए दावेदारों की लाइन लग गई। चुनाव प्रभारी एडवोकेट बिंदेश गुप्त और सह प्रभारी हेमा जोशी की मौजूदगी में बृहस्पतिवार को पांच घंटे से अधिक वक्त तक माथापच्ची हुई, लेकिन किसी एक नाम पर आम राय नहीं बन सकी। वर्तमान जिलाध्यक्ष सहित 16 नेताओं ने इस कुर्सी पर दावा जताया।
टीआरसी में सुबह 11 बजे भाजपा नेताओं का जमावड़ा लग गया। चुनाव प्रभारी और सह प्रभारी ने जिलाध्यक्ष के लिए लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, पूर्व मंत्री बीना महराना और डीसीबी के निदेशक हयात सिंह माहरा सहित वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं से राय जानी। सभी नौ मंडल और नौ प्रतिनिधियों, जिला पदाधिकारी, जिला पंचायत सदस्य, ब्लाक प्रमुख, वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से भी मंत्रणा की गई।
साथ ही दावेदारों से अलग-अलग बात कर उनका पक्ष जाना। घंटों चली बैठक में किसी एक के नाम पर सहमति नहीं बन सकी। चुनाव प्रभारी गुप्त ने कहा कि यहां कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक को राज्य नेतृत्व के समक्ष रखा जाएगा। बैठक में पूर्व जिलाध्यक्ष नरेश करायत, मोहन सिंह अधिकारी, हरीश मिश्रा, रमेश पंत, हरीश हैसियत, मुकेश महराना, राजू अधिकारी, डीडी जोशी, एनडी गड़कोटी, त्रिलोक गिरि, नवीन तड़ागी आदि थे।
यह हैं जिलाध्यक्ष के 16 दावेदार
भाजपा के सातवें जिलाध्यक्ष की कुर्सी के लिए 16 दावेदार सामने आए। मौजूदा जिलाध्यक्ष सुभाष बगौली, ब्लाक प्रमुख निर्मल महरा, जिला महामंत्री गोविंद सामंत, केएमवीएन के पूर्व निदेशक श्याम नारायण पांडेय, दीपक पाठक, जिला पंचायत सदस्य मुकेश कुमार, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ललित मोहन पांडेय, पूर्व जिला महामंत्री हरीश पांडेय, हिमेश कलखुड़िया, रामदत्त जोशी, भुवन गहतोड़ी, नरेश सकारी, मुकेश कलखुड़िया, संजय जोशी, ललित मोहन कुंवर और सुरेंद्र बोहरा ने दावा जताया है।
कांग्रेस की राह पर चलेगी भाजपा!
कांग्रेस की राह पर भाजपा के चलने के आसार बढ़ गए हैं। किसी एक नाम पर व्यापक सहमति नहीं बनने और टकराव के मद्देनजर भाजपा में भी पहली बार जिलाध्यक्ष की कमान अनुसूचित जाति के नेता को सौंपने के आसार बन रहे हैं। लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल सहित कई वरिष्ठ नेताओं की भी इस पर हामी है। स्वयं विधायक फर्त्याल का कहना है कि चंपावत के ब्लाक प्रमुख पुष्पा सकारी के पति और अनुसूचित प्रकोष्ठ के नेता नरेश सकारी तथा जिला पंचायत सदस्य मुकेश कुमार में से किसी एक को अध्यक्ष बनाया जाना सामाजिक समरसता की दृष्टि से भी ठीक है। इससे पार्टी का जनाधार भी मजबूत होगा। अगर ऐसा होता है तो भाजपा का चंपावत जिले में पहला अनुसूचित अध्यक्ष होगा। वैसे कांग्रेस ने भी चार साल पूर्व अनुसूचित वर्ग के डा. मोहन राम को अध्यक्ष बनाया था और भाजपा भी कमोबेश अब उसी के नक्शेकदम पर चलती नजर आ रही है।