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भाजपा जिलाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर घ्ामासान

Mon, 02 Nov 2015 10:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
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भारतीय जनता पार्टी जिलाध्यक्ष का इंतजार लंबा होता जा रहा है। जिलाध्यक्ष की कुर्सी को लेकर रस्साकशी पूरे उफान पर है। मौजूदा अध्यक्ष को दूसरा मौका मिले या किसी नए नेता को जिम्मेदारी सौंपी जाए, लेकिन यह तो तय है कि अध्यक्ष का चेहरा भाजपा संगठन के चुनाव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सक्रिय भूमिका को मापेगा।
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भाजपा अध्यक्ष की कुर्सी के लिए दावेदारी बेशक 15 नेताओं ने ठोंकी हो, लेकिन मुख्य मुकाबला तीन से चार नेताओं के बीच है। इनमें से एक मौजूदा पदाधिकारी को सबसे ज्यादा समर्थन का दावा है। जिला इकाई, प्रांतीय नेतृत्व से लेकर कई सांसद तक इस युवा नेता के नाम की पैरवी कर रहे हैं।

मगर आरएसएस के एक पदाधिकारी की राय इससे अलग है, और वे एक पूर्व जिला महामंत्री को इस कुर्सी के लिए बेहतर मान रहे हैं। बताते हैं कि पार्टी के कई प्रदेश स्तरीय वरिष्ठ नेता भी उक्त महामंत्री को बागडोर सौंपने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं जिले के कुछ वरिष्ठ नेता भी बढ़-चढ़ कर उनका विरोध कर रहे हैं।
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इसी वजह से शनिवार को जिलाध्यक्ष के लिए इस नाम का एलान भी आखिरी मौके पर स्थगित करना पड़ा। पार्टी के भीतरी सूत्रों का कहना है कि अगर विवाद पर ब्रेक नहीं लगा, तो किसी लोप्रोफाइल नेता को भी इस कुर्सी में बिठाया जा सकता है। लेकिन इतना तय है कि जिलाध्यक्ष का चेहरा भाजपा के स्वतंत्र निर्णय को मापने का पैमाना तो बनेगा, ऐसा यहां पार्टी की सियासत को जानने वाले कह रहे हैं।

वहीं भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी के पूर्व सदस्य श्याम नारायण पांडेय और उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक के निदेशक हयात सिंह माहरा का कहना है कि पार्टी में गुटबाजी नहीं है। चुनाव के वक्त कार्यकर्ता दावेदारी पेश करते हैं। जिस नाम को भी फाइनल किया जाएगा, सभी पार्टी कार्यकर्ता पूरी शिद्दत के साथ सहयोग करेंगे। दोनों नेताओं ने कहा कि 2017 के विधानसभा चुनाव को फतह करने के लिए एकजुटता और भी जरूरी है।
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