जिले की अमोड़ी न्याय पंचायत के छतकोट ग्राम पंचायत के चांदपुर तोक में ऐतिहासिक बिरखम (सात-आठ फुट की लंबाई और एक फुट चौड़ाई के स्तंभ, स्थानीय भाषा में बारहखाम अथवा बिरखम) मिले हैं। माना जा रहा है कि इनका निर्माण चंद राजवंश के शासकों ने करवाया है।
ग्रामीणों को यह बिरखम झाड़ी कटान के दौरान मिले हैं। आसपास के ग्रामीणों को इन बिरखम के बारे में कोई भी जानकारी नहीं है। पर्वतीय क्षेत्रों में विभिन्न स्थानों में सात-आठ फुट की लंबाई और एक फुट चौड़ाई के स्तंभ पाए जाते रहे हैं।
ग्रामीण दीपक बोहरा ने बताया कि चांदपुर निवासी ग्रामीण लीलाधर भट्ट को सड़क के किनारे झाड़ी काटने के दौरान जमीन में दबे चार बिरखम दिखाई दिए। उनका कहना है कि पूर्व में इस स्थान से पैदल रास्ता गुजरता था। इतिहासकार डॉ. प्रशांत जोशी के अनुसार बिरखमों के निर्माण और इनको स्थापित करने का उद्देश्य क्या रहा होगा, कुछ कहा नहीं जा सकता है।
कुछ लोग इनको प्राचीनकाल के वीरों के स्मारकों के रूप में मान्यता देते हैं। अलबत्ता चंद शासकों की ओर से अतीत में पैदल मार्गों में राहगीरों के विश्राम के लिए बिरखमों का निर्माण किया जाता था। बिरखमों के ऊपर कहीं-कहीं तो देवता, मानव, पशुओं के चित्र अथवा कोई लेख मिलते हैं।
जिले में एक दर्जन से अधिक स्थलों पर हैं बिरखम
चंपावत। जिले के विभिन्न स्थानों में एक दर्जन से अधिक बिरखम हैं। गोलू देवता मंदिर परिसर में दो, हिंग्लादेवी मंदिर मार्ग पर एक, क्रांतेश्वर मार्ग में फूलगढ़ी, बाराकोट में तीन, रेगडू, चिलकोट, किसकोट, खेतीखान के निकट सेरा, सिप्टी, बिरगुल, धौनी शिलिंग गांव में एक-एक बिरखम हैं। इन बिरखमों में देवी-देवताओं की आकृति के अलावा शेर, हाथी आदि पशुओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं।