फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गर्भवती महिलाओं के लिए बेहतर हुई व्यवस्थाएं

Fri, 01 Jan 2016 10:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
विज्ञापन
विज्ञापन
रेफरल सेंटर के टैग से बचने के लिए जिला अस्पताल में कवायदें तेज हो गई हैं। नए साल में इस उम्मीद को पंखों की उड़ान मिल सकती है। गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी सुविधा के लिए अस्पताल में कई नई व्यवस्थाएं की गई है। साथ ही डॉक्टर की तैनाती नहीं होने तक दूसरे अस्पताल से प्रबंध किए गए हैं।
विज्ञापन


जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल में अमूमन गर्भवती महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती रही है। इसे लेकर पूर्व में कुछ विवाद भी हुए, लेकिन अब इस तस्वीर में सुधार होने की उम्मीद जगी है। गर्भवती महिलाओं के लिए बने इमरजेंसी वार्ड में दो बेडों के अलावा जरूरी सुविधाएं जुटाई गई। ऑटोक्लेव, इंटोवेटर (नवजात शिशु के तापमान को सामान्य रखने वाली मशीन), वेंटिलेटर, रेफ्रिजरेटर सहित कई महत्वपूर्ण उपकरण आ गए हैं। ऑटोक्लेव मशीन से उपकरणों की सफाई की जाती है। यह उपकरण 25 मिनट में 121 डिग्री सेल्सियस के ताप से यंत्रों को कीटाणु मुक्त करता है। सिस्टर मंजू कैड़ा का कहना है कि दिसंबर में 37 डिलीवरी अस्पताल में कराई गई।

स्वांला की डॉक्टर से हो रही राहत
करीब दो साल पहले से चल रहे जिला अस्पताल में गायिनोकोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं की गई है। अवकाश में होने की वजह से इस वक्त एक भी महिला डॉक्टर नहीं हैं। इससे निजात दिलाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने 25 दिसंबर को स्वांला की महिला डॉक्टर को यहां संबद्ध किया है। डा.मेघा गुप्ता के आने से मरीजों को राहत मिल रही है।
विज्ञापन


गर्भवती महिलाओं के लिए सुविधाएं बढ़ाने की पहल की गई है। इस वजह से डिलीवरी की संख्या बढ़ी है। दिसंबर में जिला अस्पताल से मात्र पांच गर्भवती महिलाओं को रेफर किया गया है। ये सभी केस क्रिटिकल थे। गायिनोकोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं होने के अलावा ब्लड बैंक नहीं होने से परेशानी हो रही है। -डा.आरपी खंडूरी, चिकित्साधीक्षक, जिला अस्पताल।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें